नॉर्वे की पत्रकार Helle Lyng ने ट्रोलर्स को ऐसे दिया जवाब

नॉर्वे की अखबार Dagsavisen की कमेंटेटर Helle Lyng Svendsen प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओस्लो यात्रा के बाद लगातार ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना कर रही हैं। Svendsen ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान PM मोदी से सवाल पूछने की कोशिश की थी। इसके बाद उनका वीडियो X पर वायरल हो गया और उन्हें मोदी समर्थकों के निशाने पर आना पड़ा। मेडियर24 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वीडियो को 80 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है और इसने समर्थन, आलोचना और उकसावे तीनों को जन्म दिया। Svendsen पर सोशल मीडिया पर जासूस और कार्यकर्ता होने के आरोप लगाए गए। खबरों के अनुसार उनका फोन नंबर भी सार्वजनिक कर दिया गया।

ट्रोलिंग के बीच Meta ने उनका Instagram और Facebook अकाउंट सस्पेंड कर दिया। इसकी जानकारी खुद Helle ने दी। Dagsavisen समेत नॉर्वे के कई अखबारों ने इस पूरे मामले पर रिपोर्टिंग की है। अखबार के प्रधान संपादक लार्स वेस्ट जॉनसन ने मेडियर24 को बताया कि उन्हें कमेंटेटर की सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं है।

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ट्रोलिंग के बीच Helle Lyng Svendsen ने सोशल मीडिया पर अपनी एक और तस्वीर साझा की। उन्होंने लिखा कि अगर उनकी एडिट बनाने वाले लोगों को हॉलिडे फोटो के अलावा कोई और तस्वीर चाहिए तो ये 17 मई की है, जब उन्होंने Åmli की अपनी पारंपरिक बुनाड पहनी थी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी, प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र में भागीदारी हमारे संविधान की स्थापना के समय से ही बेहद जरूरी रही है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब PM मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे की जॉइंट ब्रीफिंग खत्म होने के बाद Svendsen ने सवाल पूछा। उन्होंने PM मोदी से ‘दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस’ से सवाल न लेने पर टोका। नॉर्वे वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पहले स्थान पर है, जबकि भारत 157वें स्थान पर है। Helle का कहना है कि उनका काम उन प्रभावशाली लोगों से सवाल करना है जो इंटरव्यू नहीं देना चाहते। उन्होंने कहा, ‘मोदी ने भारत में पिछले 12 सालों में कभी पूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के जवाब नहीं दिए हैं। यह दिखाना जरूरी है कि नॉर्वे में हम अपना काम कर रहे हैं।’

Helle ने आगे बताया कि उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री स्टोरे से भी पूछा था कि नॉर्वे भारत को लोकतंत्र क्यों कहता है, जबकि भारतीय प्रधानमंत्री ने 12 साल में कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। ‘क्या अब लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र प्रेस का महत्व नहीं रह गया?’ इस पर स्टोरे ने भारत में चुनाव होने का हवाला दिया। उन्होंने दोनों देशों की प्रेस संस्कृति में अंतर को माना, साथ ही भारत की विशाल जनसंख्या का भी जिक्र किया।

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इस घटना के बाद विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में भी Svendsen और MEA सचिव सिबी जॉर्ज के बीच तीखी बहस हुई थी। वायरल वीडियो के बाद जहां Svendsen को ट्रोलिंग झेलनी पड़ी, वहीं X पर उनके फॉलोअर्स तेजी से बढ़े। यह मामला अब भारत-नॉर्वे के कूटनीतिक रिश्तों के साथ-साथ प्रेस की आजादी और नेताओं की जवाबदेही पर वैश्विक बहस का मुद्दा बन गया है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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