New Income Tax Regime: 1 अप्रैल से बदल जाएंगे नियम, क्रेडिट कार्ड-एटीएम यूजर्स पर सख्त नजर, HRA और कैश ट्रांजेक्शन में बदलाव

March 31, 2026 12:16 PM
New Income Tax Regime

नई दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने 20 मार्च को इनकम टैक्स नियम 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। ये नियम नई इनकम टैक्स एक्ट 2025 को लागू करने के लिए बनाए गए हैं और 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे। सरकारी गजट में जारी अधिसूचना के मुताबिक, नया फ्रेमवर्क टैक्स कानून को सरल बनाने पर जोर देता है, लेकिन वित्तीय लेन-देन के लिए कई नई शर्तें जोड़ी गई हैं। टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन रिपोर्टिंग और अनुपालन के नियम कड़े हो गए हैं।

क्रेडिट कार्ड और एटीएम यूजर्स के लिए मुख्य बदलाव

क्रेडिट कार्ड धारकों और एटीएम से नियमित कैश निकासी करने वालों को अब ज्यादा सतर्क रहना होगा। नया क्रेडिट कार्ड जारी कराते समय PAN कार्ड देना अनिवार्य होगा। बिना PAN के बैंक या वित्तीय संस्थान आवेदन स्वीकार नहीं करेंगे।

PAN कार्ड बनवाने या अपडेट कराते समय क्रेडिट कार्ड का हालिया स्टेटमेंट जो 3 महीने पुराना होगा, अब वैध एड्रेस प्रूफ माना जाएगा। इससे उन लोगों को आसानी होगी जिनके पास बिजली बिल या बैंक स्टेटमेंट नहीं है।

बैंक या पोस्ट ऑफिस से सालाना 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा कैश जमा/निकासी (एटीएम सहित) पर PAN कोट करना जरूरी होगा। कुछ मामलों में 20 लाख रुपये का थ्रेशोल्ड भी लागू हो सकता है। इससे हाई वैल्यू कैश ट्रांजेक्शन की निगरानी बढ़ेगी।

होटल, रेस्टोरेंट या इवेंट में 1 लाख रुपये या उससे ज्यादा कैश पेमेंट करने पर भी PAN या संबंधित घोषणा देनी होगी। उच्च मूल्य के क्रेडिट कार्ड खर्च जैसे सालाना 10 लाख रुपये से ज्यादा डिजिटल पेमेंट की जानकारी बैंक या कार्ड जारीकर्ता इनकम टैक्स विभाग को स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन (SFT) के जरिए दे सकते हैं।

1 लाख रुपये या उससे ज्यादा कैश बिल पेमेंट भी रिपोर्ट होने की संभावना है। कंपनी द्वारा दिए गए क्रेडिट कार्ड पर निजी खर्च को अब सैलरी का ‘पर्क्विजिट’ माना जाएगा और टैक्स लगेगा। क्रेडिट कार्ड से टैक्स भुगतान की सुविधा भी शुरू हो सकती है, हालांकि बैंक चार्ज या ब्याज लग सकता है।

आम आदमी से जुड़े अन्य अहम बदलाव

नए नियम साधारण टैक्सपेयर को भी सीधे प्रभावित करेंगे, खासकर सैलरीड क्लास और छोटे कैश यूजर्स को। HRA क्लेम में राहत बरकरार है। मेट्रो शहरों में 50% और अन्य में 40% छूट है, लेकिन किराए के मालिक का PAN और मकान मालिक-किरायेदार का रिश्ता बताना अनिवार्य हो गया है (अगर सालाना किराया 1 लाख रुपये से ज्यादा है)।

कैश ट्रांजेक्शन की निगरानी बढ़ी है। सालाना 1 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा या विदेश यात्रा/बिजली बिल जैसे खर्च पर ITR फाइल करना अनिवार्य हो सकता है।

ये बदलाव पुराने 1962 के नियमों की जगह ले रहे हैं और कानून को आसान बनाने के साथ-साथ टैक्स चोरी रोकने का मकसद रखते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आम आदमी को ज्यादा पेपरवर्क नहीं बढ़ेगा, लेकिन हाई स्पेंडिंग या कैश यूज करने वालों को रिकॉर्ड रखने की आदत डालनी होगी।

टैक्सपेयर को सलाह है कि अप्रैल 2026 से पहले PAN अपडेट कर लें और बड़े खर्चों का हिसाब रखें। विस्तृत जानकारी के लिए incometaxindia.gov.in चेक करें या टैक्स सलाहकार से संपर्क करें।

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