इंसानियत का दीपक

February 3, 2026 12:30 PM
Mohammad Deepak

उत्तराखंड के कोटद्वार में एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार पर अपनी दुकान का नाम बदलने के लिए दबाव बनाने वाले बजरंग दल के विरोध के बावजूद उस बुजुर्ग दुकानदार के पक्ष में पुरजोर तरीके से खड़े होने वाले युवा जिम ट्रेनर दीपक कुमार हमारे गणतंत्र के लिए रोशनी की एक किरण बनकर सामने आए हैं।

यह बताने की जरूरत तो नहीं ही है कि यह घटना तब सामने आई थी, जब 26 जनवरी को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने तीस साल से बाबा गारमेंट के नाम से दुकान चले रहे बुजुर्ग वकील अहमद पर दबाव बनाया कि वे अपनी दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटा लें। बजरंग दल के कार्यकर्ता दावा कर रहे थे कि बाबा शब्द उनके ‘सिद्ध बाबा’ का नाम है। जबकि दुकान के बोर्ड में वकील अहमद ने अपने बेटे शोएब का नाम भी लिख रखा था। विरोध बढ़ने पर नजदीक के जिम ट्रेनर दीपक न केवल बुजुर्ग दुकानदार के पक्ष में डटकर खड़े हो गए, बल्कि खुद का परिचय मोहम्मद दीपक के रूप में देकर इस घनघोर सांप्रदायिकता भड़काने वाले दौर में एक बड़ा संदेश भी दिया है।

उत्तराखंड पुलिस का दावा है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत से सुलह हो गई है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में उसका रवैया बेहद गैरजिम्मेदाराना रहा है।

दरअसल भाजपा शासित उत्तराखंड हिंदुत्व की एक और प्रयोगशाला है, जहां बजरंग दल जैसे भाजपा पोषित संगठनों में न अदालत का भय है और न ही संविधान का।

अव्वल तो यही कि बजरंग दल के कार्यकर्ता कौन होते हैं किसी भी दुकानदार पर दुकान का नाम बदलने का दबाव बनाने वाले? पुलिस ने उन्हें तत्काल क्यों नहीं रोका?

वास्तव में पुलिस को जो काम करना चाहिए था वह काम दीपक कुमार ने आगे आकर किया।

दरअसल कोटद्वार की इस घटना को अपवाद नहीं मानना चाहिए। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में बजरंग दल जैसे संगठन जिस तरह से कानून को अपने हाथ में लेकर खासतौर से अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं, उसे भाजपा-आरएसएस की हिंदुत्व की राजनीति से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

जब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा खुलेआम मियां रिक्शावालों को सताने का एलान करते हैं, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि नफरत की दरारों को खाद पानी कहां से मिल रहा है।

इस सबके बावजूद कोटद्वार के दीपक कुमार सचमुच हमारे दौर के नायक हैं। दरअसल उन्हें जिस तरह की धमकी मिल रही है, ऐसे में यह राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार की जिम्मेदारी है कि वे उनकी पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करें।

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