लेंस डेस्क। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के फैसले के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने से ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसके प्रभाव से भारतीय शेयर बाजार इस सप्ताह भारी गिरावट का शिकार हुआ। यह चार सालों का सबसे बुरा सप्ताह साबित हुआ, जिसमें निवेशकों को कुल 19 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
13 मार्च यानी शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 1,470 अंकों की भारी गिरावट के साथ 74,563 के स्तर पर बंद हुआ, जो 75,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से काफी नीचे है। सिर्फ एक दिन में बाजार मूल्यांकन में करीब 9.8 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। पिछले शुक्रवार (7 मार्च) को सेंसेक्स 78,918 पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 468 अंकों की गिरावट के साथ 23,170 पर बंद हुआ। इस सप्ताह बाजार पूंजी 449.35 लाख करोड़ से घटकर 430 लाख करोड़ रह गई।
तेल की कीमतों में उछाल के कारण एशियाई बाजारों में भी भारी बिकवाली देखी गई। जापान का निक्केई 225, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का CSI300 और हांगकांग के सूचकांक सभी लाल निशान पर बंद हुए। निक्केई और कोस्पी में 5-7 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि MSCI एशिया-पैसिफिक इंडेक्स भी सप्ताह के दौरान 1.5 प्रतिशत नीचे आया। मॉर्गन स्टैनली ने चेतावनी दी है कि उच्च तेल कीमतें एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़ा खतरा हैं और मांग में कमी आ सकती है।
बाजार विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से भू-राजनीतिक अनिश्चितता, विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली और तेल की कीमतों के दबाव से आई है। जियो जित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा, “अमेरिकी बाजारों में कमजोरी और ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर के आसपास रहने से बुल्स रक्षात्मक मुद्रा में हैं।
FII की लगातार बिकवाली बड़े कैप शेयरों पर भी दबाव डाल रही है। इतिहास बताता है कि युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव का असर अस्थायी होता है, इसलिए निवेशक लंबी अवधि में बने रहें।”
जियो जित के ही चीफ मार्केट स्ट्रैटजिस्ट आनंद जेम्स ने चेतावनी दी कि अगर संघर्ष बढ़ा तो निफ्टी 22,000 या यहां तक कि 19,000 तक गिर सकता है। मिंट और इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, अगर तेल कीमतें ऊंची बनी रहीं तो निफ्टी 22,900 के सपोर्ट जोन तक फिसल सकता है। हालांकि, कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट अल्पकालिक है और लंबे समय में बाजार ठीक हो जाएगा।
वैश्विक स्तर पर भी अमेरिकी बाजार (S&P 500, nasdaq dow) 1.5-1.8 प्रतिशत नीचे बंद हुए, जबकि यूरोपीय बाजार कमजोर रहे। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति मुद्रास्फीति, राजकोषीय घाटा और रुपया कमजोर होने का खतरा बढ़ा रही है।











