छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन (mid day meal) तैयार करने वाली रसोइयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल और धरना प्रदर्शन आज अपना 20वां दिन पूरा कर रहा है। छत्तीसगढ़ स्कूल मध्यान्ह भोजन रसोइया संयुक्त संघ के बैनर तले प्रदेश भर से हजारों रसोइया राजधानी रायपुर सहित विभिन्न जिलों में कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे डटे हुए हैं। रसोइयों की तीन सूत्रीय प्रमुख मांगों में मानदेय को कलेक्टर दर पर बढ़ाना, 12 महीने का पूर्ण मानदेय और अन्य मूलभूत सुविधाएं शामिल हैं लेकिन राज्य सरकार अब तक वार्ता के लिए आगे नहीं आई है, जिससे प्रदर्शनकारी भूखे-प्यासे और बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहने को मजबूर हैं।
इस वीडियो में सुनिए उनका दर्द-
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें महज 2000 रुपये प्रतिमाह का मानदेय मिलता है, वह भी केवल 10 महीने के लिए और वो भी समय पर नहीं। अन्य राज्यों में तमिलनाडु में 10-12 हजार, केरल में 12 हजार, पुदुचेरी में 21 हजार रुपये तक मानदेय दिया जाता है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह राशि महंगाई और दैनिक मजदूरी के हिसाब से बेहद कम है। इसके अलावा रसोइयों को कोई अवकाश नहीं मिलता, छात्र संख्या के आधार पर काम से हटाया जा सकता है, अन्य कार्य भी करवाए जाते हैं और वे आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाओं से भी वंचित हैं।
धरना स्थल पर पानी, राशन, शौचालय जैसी मूल सुविधाओं की कमी से विशेषकर महिलाएं परेशान हैं, जो खुले में शौच करने को मजबूर हैं।प्रदेश अध्यक्ष रामराज कश्यप, राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश कुमार, कोषाध्यक्ष कन्हैया लाल कुदराम, महामंत्री मेघराज कचरा चन्द्राकर और उपाध्यक्ष सविता मानिकपुरी सहित संघ के अन्य पदाधिकारियों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया है। रसोइयों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द वार्ता नहीं करती तो आंदोलन और तेज होगा, जिससे स्कूलों में मिड-डे मील योजना पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। संगठन ने सरकार से तत्काल मांगों पर विचार करने और रसोइयों की दयनीय स्थिति सुधारने की मांग की है।









