मणिपुरः उस बेटी का क्या कसूर था

Manipur

मणिपुर की नस्लीय हिंसा के दौरान सामूहिक दुष्कर्म का शिकार हुई बीस साल की कुकी युवती की मौत अत्यंत दुखद होने के साथ ही हमारी चेतना पर कड़े प्रहार की तरह है। इस घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था, इसके बावजूद मणिपुर की उस बेटी को जीते जी न्याय नहीं मिल सका।

हकीकत यह है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह नस्लीय हिंसा पर काबू करने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुए थे, इसके बावजूद लंबे समय तक मोदी सरकार ने उन्हें पद पर बनाए रखा था।

उस युवती के साथ जो कुछ हुआ था, उसने बर्बरता की सारी हदें तोड़ दी थी। आज यह सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि 18 बरस की इस युवती को बहुसंख्यक मैतेई समुदाय के एक महिला संगठन मीरा पैबी की कार्यकर्ताओं ने राजधानी इम्फाल के एक एटीएम कियोस्क से अगवा कर एक मैत्रेई सशस्त्र गुट के हवाले कर दिया था! बाद में उसे बिश्नुपुर जिला ले जाया गया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

उसे जिस भयानक यातना से गुजरना पड़ा उससे समझा जा सकता है कि नस्लीय हिंसा के दौरान वहां न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार का उपद्रवियों पर कोई नियंत्रण रह गया था। पूरे तंत्र की जड़ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन पंक्तियों के लिखे जाने तक सामूहिक दुष्कर्म के एक भी आरोपी को गिरफ्तार तक नहीं किया जा सका है।

उसकी मां ने एक नर्स की मदद से उसे किसी तरह गुवाहाटी के अस्पताल पहुंचाया था, लेकिन लंबे संघर्ष के बावजूद उसे नहीं बचाया जा सका। वह बिटिया उस सदमे से कभी उबर ही नहीं पाई।

तीन मई, 2023 में भाजपा की तत्कालीन सरकार के एक फैसले ने मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों को नस्लीय हिंसा की ओर धकेल दिया था। राज्य सरकार ने बहुसंख्यक मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने के फैसले ने कुकी जनजाति समूह को खतरे में डाल दिया था, क्योंकि उन्हें अंदेशा था कि इसके जरिये मैतेई उनके इलाकों पर अधिकार जमा लेंगे।

वास्तव में मैतेई-कुकी हिंसा के दौरान महिलाओं के यौन उत्पीड़न की अनेक घटनाएं समाने आई थीं। यहां तक कि कुछ महिलाओं की नग्न परेड तक कराई गई थी और उनके वीडियो वायरल किए गए थे। यह किस तरह की मानसिकता है और ये कौन लोग हैं?

मणिपुर में पिछले फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है, इसके बावजूद वहां पीड़ितों के साथ न्याय होता नहीं दिख रहा है। इसके उलट वहां भाजपा फिर से सरकार बनाने की कवायद करती दिख रही है।

वास्तव में उस बिटिया के साथ हुई ज्यादती सहित मणिपुर की जातीय हिंसा से जुड़ी सारी घटनाओं की स्वतंत्र न्यायिक जांच की जरूरत है, ताकि दोषियों को सख्त सजा दिलाई जा सके।

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