नई दिल्ली। बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच Meta Platforms Inc. ने बड़ा फैसला किया है। कंपनी ने बच्चों को सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान और सुरक्षा को लेकर किए गए दावों से जुड़े एक संघीय मुकदमे को निपटाने के लिए 18 अरब डॉलर तक के कानूनी समझौते पर सहमति जताई है। इसके साथ ही अमेरिका में किशोरों के लिए Facebook और Instagram के इस्तेमाल पर कई नई पाबंदियां लगाने का फैसला किया गया है। फिलहाल ये नियम केवल अमेरिका में लागू होंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, Meta अगले 10 वर्षों तक किशोरों के Facebook और Instagram इस्तेमाल को रोजाना दो घंटे तक सीमित करेगी। इसके अलावा रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक किशोरों की इन प्लेटफॉर्म तक पहुंच बंद रहेगी। हालांकि, माता-पिता की अनुमति मिलने पर इस समय सीमा में छूट दी जा सकती है। कंपनी स्कूल के समय यानी सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक किशोरों को मिलने वाले ज्यादातर पुश नोटिफिकेशन भी बंद करेगी। इसका उद्देश्य पढ़ाई के समय सोशल मीडिया से होने वाले ध्यान भटकाव को कम करना है।
Meta अपनी सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करेगी। खास तौर पर उम्र के आधार पर प्रतिबंधित सामग्री तक बच्चों की पहुंच रोकने के लिए नए उपाय किए जाएंगे। साथ ही किशोरों द्वारा सुरक्षा सेटिंग्स को बंद करने या उनमें बदलाव करने की क्षमता पर भी सीमाएं लगाई जाएंगी।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब दुनियाभर में बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर बहस तेज हो रही है। विशेषज्ञों और सरकारों की चिंता खास तौर पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, हानिकारक सामग्री तक पहुंच और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर है।
कई देशों ने इस दिशा में कदम भी उठाए हैं। ऑस्ट्रेलिया ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने वाला कानून लागू किया है। इटली में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी है। ब्रिटेन में भी 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने की योजना पर चर्चा चल रही है। वहीं डेनमार्क ने 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही है।
Meta का नया फैसला फिलहाल अमेरिका तक सीमित है, लेकिन इससे यह सवाल जरूर उठ रहा है कि क्या बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए भारत समेत दूसरे देशों में भी सोशल मीडिया कंपनियों पर इसी तरह की सख्त जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है।











