नई दिल्ली।महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने भारत निर्वाचन आयोग को फॉर्म 6 में संशोधन करने का प्रस्ताव भेजा है। इसका मकसद उन नागरिकों को बिना कानूनी डर के मतदाता सूची में दोबारा शामिल होने का मौका देना है, जिनके नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हटा दिए गए थे।
समस्या कहां से है?
फॉर्म 6 का शीर्षक है “नए मतदाताओं के लिए आवेदन पत्र”। इसमें आवेदक को यह घोषणा करनी होती है:“मैं पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर रहा हूं और मेरा नाम किसी भी विधानसभा क्षेत्र संसदीय क्षेत्र में दर्ज नहीं है।”लेकिन झूठी घोषणा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत दंडनीय है जिसमें एक साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
चुनाव आयोग ने SIR के बाद “छूटे हुए” मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए 29 सितंबर को 20 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष अभियान शुरू किया और फॉर्म 6 इस्तेमाल करने का निर्देश दिया। लेकिन पहले पंजीकृत मतदाता जिनके नाम SIR में हटे इस फॉर्म से दोबारा आवेदन करने से हिचकिचा रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि “पहली बार” की घोषणा झूठी साबित हो सकती है और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इससे मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ERO) को जमीनी स्तर पर दिक्कत हो रही है।
महाराष्ट्र CEO का प्रस्ताव
समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार महाराष्ट्र CEO के कार्यालय ने ECI को ये बदलाव सुझाए हैं:
- फॉर्म 6 के शीर्षक से “नए मतदाता” शब्द हटाया जाए।
- उन आवेदकों के लिए वैकल्पिक घोषणा जोड़ा जाए, जो पहले किसी विधानसभा क्षेत्र में पंजीकृत थे लेकिन अब कहीं नामांकित नहीं हैं और दोबारा नाम जुड़वाना चाहते हैं।
- आवेदक अपना पुराना EPIC (मतदाता पहचान पत्र) नंबर दे सकें, ताकि अधिकारी पुराना रिकॉर्ड आसानी से ट्रेस कर सकें।
यह प्रस्ताव पिछले हफ्ते भेजा गया। फॉर्म 6 में कानूनी बदलाव के लिए केंद्र सरकार को निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 में संशोधन करना होगा।
विवाद की स्थिति क्यों पैदा हुई
जुलाई में ऑनलाइन फॉर्म 6 में एक अतिरिक्त सवाल जोड़ा गया था (क्या आवेदक या उनके माता-पिता/दादा-दादी पिछले SIR में मतदाता सूची में थे)। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इसे नियमों के खिलाफ और गैर-कानूनी बताया था।ECI ने बाद में कहा कि यह घोषणा सिर्फ “SIR चरण” के दौरान लागू होगी और जहां SIR पूरा हो चुका है, वहां पुराना फॉर्म बहाल कर दिया गया।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ने किसी संशोधित फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट ECI के रिकॉर्ड की जांच करेगी। दिल्ली में नाम दोबारा जोड़ने को लेकर भ्रम पर भी सुनवाई चल रही है।
गोवा का उदाहरण
गोवा में 97 पात्र मतदाताओं को अधिकारियों ने सुनवाई के बाद सही पाया, लेकिन ECINet सॉफ्टवेयर में नाम हटाने का फैसला पलटने का विकल्प नहीं था। अंतिम सूची उनके बिना प्रकाशित हुई और उन्हें फॉर्म 6 से नया आवेदन करने को कहा गया। महाराष्ट्र CEO पहले भी ECINet में बदलाव की मांग कर चुके हैं (जिसमें से कुछ मान ली गईं। महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियों की समयसीमा 26 अक्टूबर को खत्म हो रही है और अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को जारी होनी है। इस प्रस्ताव से हजारों वैध मतदाताओं के मताधिकार सुरक्षित करने में मदद मिल सकती है।








