अंकिता भंडारी केस : दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर सिक्किम में विरोध, 19 अक्टूबर को शपथ कार्यक्रम

Ankita Bhandari case : उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद इस फैसले का विरोध हो रहा है। सिक्किम में कांग्रेस, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (SDF) और स्थानीय लोगों ने नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित VIP कनेक्शन की जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।

इस बीच सोशल मीडिया पर 19 अक्टूबर को सिक्किम बंद का दावा किया जा रहा है। दूसरी ओर दुष्यंत गौतम 19 अक्टूबर को राज्यपाल पद की शपथ लेंगे।

दुष्यंत गौतम की नियुक्ति का विरोध क्यों?

दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति के बाद उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। इस मामले में दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन कथित VIP की भूमिका को लेकर सवाल अब भी उठाए जा रहे हैं।

सिक्किम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने नियुक्ति के विरोध में गंगटोक में प्रदर्शन किया और गौतम को राज्यपाल बनाए जाने के फैसले को वापस लेने की मांग की। वहीं, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने भी जांच पूरी होने तक उन्हें पद की जिम्मेदारी नहीं सौंपने की मांग उठाई।

रिपोर्टों के मुताबिक, 17 अक्टूबर को SDF ने गंगटोक, नामची, ग्यालशिंग और जोरथांग में कैंडल मार्च और कैंडललाइट कार्यक्रम आयोजित किए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अंकिता मामले में उठ रहे सवालों का जवाब सामने आना चाहिए और कथित VIP कनेक्शन की जांच पूरी होनी चाहिए।

क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?

अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की रहने वाली थीं। वह ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। बाद में उनका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ। इस मामले में पुलिस ने रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और दो अन्य आरोपियों, सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया था। मई 2025 में अदालत ने तीनों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

मामले में एक कथित VIP को विशेष सेवाएं देने के दबाव से जुड़ा आरोप भी सामने आया था। इसके बाद अंकिता के परिवार और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कथित VIP की पहचान सार्वजनिक करने और मामले के सभी पहलुओं की जांच कराने की मांग की।

दुष्यंत गौतम का नाम विवाद में कैसे आया?

अंकिता हत्याकांड में कथित VIP की भूमिका को लेकर समय-समय पर कई दावे सामने आए हैं। 2025 के अंत और 2026 में सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो और वीडियो के बाद यह विवाद फिर तेज हुआ। पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौड़ और उर्मिला सनावर से जुड़ी कथित बातचीत के आधार पर दुष्यंत गौतम का नाम भी इस विवाद में आया।

दुष्यंत गौतम ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है और इस मामले में कानूनी कार्रवाई भी की है। जून 2026 में उत्तराखंड हाईकोर्ट से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने उनकी शिकायत पर दर्ज FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया था।

अंकिता के माता-पिता ने क्या मांग की?

अंकिता के माता-पिता ने कथित VIP कनेक्शन की जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रोकने की मांग की है। अक्टूबर में उन्होंने दिल्ली के इंडिया गेट पर प्रदर्शन भी किया था। 14 अक्टूबर को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने अंकिता के माता-पिता से मुलाकात कर उनके प्रति समर्थन जताया। इसके अगले दिन दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान अंकिता के माता-पिता और कुछ अन्य लोगों को हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

परिवार ने सरकार से नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी थी। उनका कहना है कि जब तक कथित VIP से जुड़े सवालों का जवाब नहीं मिलता, तब तक मामले को पूरी तरह सुलझा हुआ नहीं माना जा सकता।

राज्यपाल की नियुक्ति और संवैधानिक सवाल

इस विवाद में संविधान के अनुच्छेद 361 का भी जिक्र हो रहा है। यह अनुच्छेद राष्ट्रपति और राज्यपालों को उनके पद पर रहते हुए कुछ कानूनी संरक्षण देता है। इसी आधार पर नियुक्ति के समय और जांच की स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

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