मध्यप्रदेश की महिला जज पर लिंचिंग के मामले में गौ रक्षकों के खिलाफ सजा देने पर ताबड़तोड़ ऑनलाइन हमला

Madhya Pradesh

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की एक जज को अपने फैसले के बाद गंभीर सांप्रदायिक हमलों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें उन्होंने एक लिंचिंग मामले में गौ-रक्षकों को दोषी ठहराया था।

इस महीने की शुरुआत में, नर्मदापुरम जिले की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान ने 2022 में गौ-तस्करी के शक में ट्रक ड्राइवर शेख लाला नजीर अहमद की लिंचिंग के मामले में 7 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।फैसले के दिन दोषियों के परिवार वालों ने विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस वाहन को दोषियों को जेल ले जाने से रोकने की कोशिश की।

फैसले के तुरंत बाद कई ऑनलाइन वीडियो और पोस्ट सामने आए, जिनमें जज को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया।सीओनी मालवा में मध्य प्रदेश पुलिस ने जज तबस्सुम खान के खिलाफ लक्षित सांप्रदायिक ऑनलाइन अभियान के बाद अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध धारा 302 और 196 BNS के तहत FIR दर्ज की है।

एक वीडियो जो X पर व्यापक रूप से वायरल हुआ में गुजरात के बताए जा रहे विशाल सिंह नामक व्यक्ति को जज को धमकाते और सांप्रदायिक गालियां देते हुए देखा जा सकता है। वह दोषियों को 10 दिनों के अंदर रिहा करने की मांग कर रहा है।एक अन्य वीडियो में पंजाब के मोहाली से बताए जा रहे कई लोगों को दोषियों की रिहाई की मांग करते हुए जज की पुतला जलाते हुए दिखाया गया।

ट्विटर अकाउंट HinduNation ने एक ट्वीट में लिखा, ‘अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए, माननीय अदालत के नियमों को नजरअंदाज करते हुए और दुर्भावना से पक्षपात दिखाते हुए जज तबस्सुम खान ने गौ-रक्षकों को उम्रकैद की सजा दी। माननीय सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध है कि इस पक्षपाती जज तबस्सुम खान को निलंबित किया जाए, जो जनता के प्रति पक्षपाती है और न्यायपालिका के नियमों का उल्लंघन करती है, ताकि जनता को न्याय मिल सके और सभी गौ-रक्षक रिहा हो सकें जो गौ-माता की सेवा कर सकें। इस तथाकथित धार्मिक जज के पूरे कार्यकाल के दौरान दिए गए सभी फैसलों की जांच होनी चाहिए।’

एक अन्य वीडियो में गौ-रक्षकों का जुलूस दिखाया गया, जिसमें दोषियों की रिहाई की मांग की जा रही थी। इस वीडियो को शेयर करते हुए एक यूजर ने जज पर धर्म के आधार पर फैसला देने का आरोप लगाया और उनकी बर्खास्तगी की मांग की। यूजर ने दावा किया कि गौ-रक्षा अपराध नहीं है।सीओनी मालवा क्षेत्र में प्रैक्टिस करने वाले कई वकीलों सहित प्रमुख व्यक्तियों ने एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ इस ऑनलाइन उत्पीड़न को रोकने के लिए प्रभावी कदम न उठाए जाने की निंदा की है।

राज्यसभा सदस्य और कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जज को निशाना बनाने वाले एक वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा: “सभी दोषी हिंदू पुरुष ही हैं। लेकिन उन्हें उनकी धर्म के कारण दोषी नहीं ठहराया गया; उन्हें इसलिए दोषी ठहराया गया क्योंकि जांच में उन्हें दंगे, हत्या के प्रयास और हत्या का दोषी पाया गया। फिर भी वीडियो में हमारे हिंदू भाई उनके व्यवहार से नाराज नहीं हैं। उनकी नाराजगी सिर्फ एक बात पर है कि उन्हें दोषी ठहराने वाली जज एक मुस्लिम महिला हैं।”

खेड़ा ने सवाल किया कि जज के खिलाफ नफरत फैलाने वालों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

सीनियर एडवोकेट विवेक टंखा ने जज पर हमलों की निंदा करते हुए कहा, ‘समय आ गया है कि कानून का भाईचारा और जागरूक नागरिक जजों की सराहना करें और उनकी रक्षा करें, जो साहस दिखाकर कानून के शासन को बनाए रखते हैं। खासकर निचली अदालतों में।’

टंखा ने आगे कहा कि उच्च न्यायपालिका और सरकार की इस मुद्दे पर चुप्पी चौंकाने वाली है।मामला 2-3 अगस्त 2022 की रात का है, जब पीड़ित नरदरवाड़ा से महाराष्ट्र की ओर मवेशी ले जा रहे थे। बरखंड गांव के पास सीओनी मालवा में ग्रामीणों की भीड़ ने उनका वाहन रोका और डंडों-लाठियों से उन पर हमला कर दिया। नजीर अहमद अपनी चोटों के कारण मर गए, जबकि उनके साथी शेख मुश्ताक घायल हो गए।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now