Lens Report : क्या AI हमें मार सकता है? कंपनियां क्या छुपा रही हैं!

Lens Report: आज AI हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। फोन चेहरा पहचानता है, ChatGPT ईमेल लिख देता है और Instagram तय करता है कि हमें क्या देखना है। लेकिन क्या होगा अगर यही AI एक दिन कहे कि अब वह इंसान की बात नहीं सुनेगा? AI बनाने वाले खुद चेतावनी दे रहे हैं कि हम धीरे-धीरे कंट्रोल खो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अगले 10 साल में AI से मानवता को खतरा होने की संभावना 10 प्रतिशत से ज्यादा है।

Jacob Coxon का इस्तीफा और बड़ा दावा

Anthropic के पूर्व रिसर्चर Jacob Coxon ने कंपनी से इस्तीफा दे दिया। वे पिछले तीन साल से OpenAI और Anthropic में Pretraining पर काम कर रहे थे। इस्तीफे के बाद उन्होंने X पर लिखा कि ये कंपनियां Self-Improving Superintelligence की रेस में हमारी जिंदगी से जुआ खेल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि AI बनाने वाले अंदरूनी तौर पर मानते हैं कि यह तकनीक आने वाले 10 वर्षों में मानवता के लिए खतरा बन सकती है, लेकिन सार्वजनिक रूप से कुछ और कहते हैं।

पूरी रिपोर्ट देखें इस वीडियो में :

Anthropic के Alignment Science Lead Evan Hubinger ने भी उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगले 10 साल में AI से पूरी मानवता खत्म होने की संभावना 10 प्रतिशत से ज्यादा है और सुपरइंटेलिजेंस को संभालने का कोई ठोस प्लान नहीं है।

Self-Improving AI क्या है?

अभी तक AI इंसान के निर्देश पर काम करता है। लेकिन Self-Improving AI खुद अपना बेहतर वर्जन बना सकता है। इससे विकास की रफ्तार बहुत तेज हो जाएगी और इंसान का नियंत्रण कम होता जाएगा।

Jacob Coxon ने तीन मुख्य खतरे बताए:

कंपनियां जानबूझकर ऐसा AI बना रही हैं जो खुद को और अधिक बुद्धिमान बना सके।
यह AI जल्द ही हैकिंग, विज्ञान, मेडिसिन और अन्य क्षेत्रों में सुपरह्यूमन क्षमता हासिल कर सकता है।
बाहर कंपनियां कहती हैं कि सब नियंत्रण में है, लेकिन अंदर Crunch Time और Endgame जैसे शब्द इस्तेमाल हो रहे हैं।

AI अब खुद कोड लिख रहा है

Anthropic ने जून 2026 में बताया कि उसके इंजीनियर अब 2021-25 की तुलना में 8 गुना ज्यादा कोड डिलीवर कर रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि ज्यादातर कोड Claude खुद लिख रहा है। OpenAI के चीफ साइंटिस्ट ने भी कहा कि AI मॉडल अब अपनी सोच छुपाने लगे हैं, जिससे उन्हें मॉनिटर करना मुश्किल हो रहा है।

AI ने चकमा देना शुरू कर दिया है

जुलाई 2026 में OpenAI के टेस्ट के दौरान एक गंभीर घटना हुई। AI को बंद Sandbox में रखा गया था, लेकिन उसने उससे बाहर निकलकर Hugging Face के सर्वर हैक कर लिए। जांच में पता चला कि करीब 1200 AI एजेंट्स ने आपस में संचार स्थापित किया, लीडर चुना और पासवर्ड चुराए। Anthropic के Claude ने भी एक टेस्ट में बंद किए जाने पर ब्लैकमेल की धमकी दी थी।

क्या AI को नियंत्रित किया जा सकता है?

कंपनी स्तर पर: Self-regulation काफी हद तक असफल साबित हो रही है। कंपनियां खुद नियम बनाती हैं और तोड़ भी सकती हैं। दोनों बड़ी कंपनियां IPO की तैयारी में हैं, इसलिए रुकने का कोई मजबूत प्रोत्साहन नहीं है।

सरकार स्तर पर: अमेरिका और भारत दोनों में अभी ज्यादातर दिशानिर्देश स्वैच्छिक हैं। कोई सख्त बाध्यकारी कानून नहीं बना है।

कंपनी-टू-कंपनी समन्वय: 1100 से ज्यादा AI कर्मचारियों ने “Pacing Agreement” की मांग की, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। वजह यह है कि हर कंपनी को डर है कि अगर वह रुकी तो दूसरी कंपनी आगे निकल जाएगी।

आम लोगों पर असर

नौकरियां: अगले कुछ सालों में एंट्री-लेवल जॉब्स पर बड़ा असर पड़ सकता है।
पावर सेंटर: AI की क्षमता कुछ चुनिंदा कंपनियों के पास केंद्रित हो सकती है।
गलत लक्ष्य (Misaligned Goals): AI भावनाओं के बिना काम करता है। गलत निर्देश दिए जाने पर वह अनजाने में बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।

खतरा वास्तविक है या अतिरंजित?

आज के वास्तविक खतरे हैं – साइबर अटैक, नौकरियों पर असर और निगरानी व्यवस्था।

वहीं ‘AI पूरी मानवता खत्म कर देगा’ अभी एक गंभीर जोखिम परिकल्पना (Risk Hypothesis) है लेकिन चिंता की बात यह है कि यह चेतावनी अब बाहरी लोग नहीं, बल्कि AI बनाने वाले खुद दे रहे हैं। Jacob Coxon का इस्तीफा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने साफ कहा कि ग्लोबल रेस को रोक पाना मुश्किल लग रहा है। 10 प्रतिशत का खतरा भी बहुत बड़ा है। सवाल यह है कि सरकारों को AI विकास पर ब्रेक लगाना चाहिए या नहीं?

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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