लैंड फॉर जॉब मामले में लालू यादव परिवार को बड़ा झटका, कोर्ट ने 41 आरोपियों पर आरोप तय किए

January 9, 2026 12:37 PM

 Land For Job Scam Case : लैंड फॉर जॉब घोटाले में पूर्व रेल मंत्री और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव तथा उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में लालू यादव उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, बेटी मीसा भारती तथा हेमा यादव समेत कुल 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। वहीं 52 आरोपियों को बरी कर दिया गया है।

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया सबूतों से लगता है कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार एक संगठित तरीके से काम कर रहे थे। कोर्ट ने टिप्पणी की कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय का इस्तेमाल अपने निजी फायदे के लिए किया और सरकारी नौकरियों को सौदेबाजी का माध्यम बनाकर परिवार के नाम पर जमीनें हासिल की गईं। जज ने इसे एक बड़ी साजिश बताया, जिसमें नौकरियां देने के बदले जमीनें ट्रांसफर की गईं।

मामले की क्या है कहानी?

यह मामला 2004 से 2009 के उस दौर से जुड़ा है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। सीबीआई का आरोप है कि इस दौरान रेलवे के विभिन्न जोनों जैसे मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में ग्रुप-डी की नौकरियां बिहार के लोगों को दी गईं। बदले में, इन नौकरी पाने वालों या उनके परिवारों ने अपनी जमीनें लालू यादव के परिवार के सदस्यों या उनकी कंपनी एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम ट्रांसफर कर दीं। जांच एजेंसी के मुताबिक, ज्यादातर मामलों में नौकरी देने से पहले ही जमीनें गिफ्ट डीड के जरिए ट्रांसफर हो गई थीं। कुछ मामलों में लालू के करीबी भोला यादव गांवों में जाकर लोगों से जमीन लिखवाने की बात करते थे और बदले में नकद भुगतान का दावा किया जाता था। सीबीआई ने कुल 103 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें से पांच की मौत हो चुकी है।

कोर्ट में क्या हुआ?

शुक्रवार की सुनवाई के दौरान लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती और बेटे तेजस्वी यादव तथा तेज प्रताप यादव कोर्ट पहुंचे। जज ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की संबंधित धाराओं के अलावा धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए। अब इन 41 आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की ट्रायल प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें गवाहों की बहस और सबूत पेश किए जाएंगे। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी। अंतिम फैसला सबूतों के आधार पर आएगा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस फैसले पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि लालू परिवार ने एक आपराधिक राजनीतिक गठजोड़ चलाया, जिसने समाजवादी आंदोलन को कलंकित किया। वहीं, भाजपा प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने इसे सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताया और कहा कि राजद को अब नैतिकता की बात करने का हक नहीं रहा। बिहार की सियासत पर इसका असर पड़ सकता है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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