केरल का बढ़ता बुजुर्ग मतदाता,पहले दिन ही 10 हजार से ज्यादा लोगों ने घर बैठे दिया वोट

March 31, 2026 5:34 PM
Kerala Elections 2026

Kerala Elections 2026: केरल विधानसभा चुनाव 2026 (9 अप्रैल को मतदान) की तैयारियों के बीच एक अनोखी और प्रेरणादायक तस्वीर उभर रही है। युवा वोटरों और आधुनिक कैंपेन की चर्चा के बीच राज्य के अनुभवी बुजुर्ग मतदाता अपनी शांत लेकिन अटूट भागीदारी से लोकतंत्र को मजबूत बना रहे हैं।90 वर्ष से अधिक उम्र के 55,000 से ज्यादा मतदाता चुनावी सूची में दर्ज हैं। इनमें 1,501 व्यक्ति 100 से 109 वर्ष की आयु के बीच हैं, जबकि 54 मतदाता 110 से 119 वर्ष के बीच पहुंच चुके हैं। ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि केरल की तेजी से बदलती जनसांख्यिकी को भी दर्शाते हैं जहां जीवन प्रत्याशा ऊंची है और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हैं।

नवीनतम विधानसभा मतदाता सूची के अनुसार, राज्य में 60 से 89 वर्ष की आयु के बीच 62,91,860 मतदाता हैं। कुल 60 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या 63,47,358 के करीब पहुंच चुकी है। आरबीआई की रिपोर्ट ‘State Finances: A Study of Budgets of 2025-26 – Demographic Transition in India’ के अनुसार, 2036 तक केरल की 22% से अधिक आबादी 60 वर्ष से ऊपर हो जाएगी जो पूरे देश में सबसे ज्यादा अनुपात है। यह बदलाव राज्य की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक नीतियों पर गहरा असर डालेगा।

घरेलू मतदान – बुजुर्गों को लोकतंत्र से जोड़ने की नई पहल

चुनाव आयोग ने 85 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घरेलू मतदान की सुविधा शुरू कर दी है। 30 मार्च से शुरू हुई यह प्रक्रिया 4-5 अप्रैल तक चलेगी। लगभग 1.45 लाख से ज्यादा 85+ बुजुर्ग और 62,000 से अधिक दिव्यांग मतदाताओं ने इस सुविधा का विकल्प चुना है। पहले दिन ही 10,922 से अधिक बुजुर्गों और दिव्यांगों ने घर बैठे अपना वोट डाल लिया। मशहूर कथकली कलाकार कला मंडलम गोपी ने भी घर से वोट डाला।

पूरे राज्य में 2,548 मतदान टीमें तैनात की गई हैं, जो घर-घर जाकर मतदान प्रक्रिया पूरी करेंगी। जो बुजुर्ग मतदान केंद्र जाना चाहते हैं, उनके लिए सक्षम ऐप के माध्यम से व्हीलचेयर, स्वयंसेवक और अन्य सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम और कन्नूर जैसे जिलों में इस सुविधा पर सबसे ज्यादा रुचि दिख रही है।

क्यों खास है केरल का यह रुझान?

केरल अपनी ऊंची जीवन प्रत्याशा और बेहतर स्वास्थ्य संकेतकों के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 90 वर्ष से ऊपर की आबादी का अनुपात यहां देश में सबसे अधिक हो सकता है। हालांकि, चुनाव आयोग के आंकड़ों में कुछ श्रेणियां (जैसे संस्थागत निवासी या पता न चलने वाले व्यक्ति) बाहर रह सकती हैं जिससे वास्तविक संख्या और भी अधिक हो सकती है।

यह ट्रेंड आने वाले वर्षों में और मजबूत होने वाला है। जहां युवा वोटरों पर फोकस रहता है, वहीं इन अनुभवी मतदाताओं की निरंतर भागीदारी लोकतंत्र की गहराई को दिखाती है। कई बुजुर्ग आज भी परंपरा के अनुसार मतदान केंद्र पहुंचकर वोट डालना पसंद करते हैं, जबकि कुछ स्वास्थ्य कारणों से घरेलू विकल्प चुन रहे हैं।

चुनाव में बुजुर्गों की भूमिका

वरिष्ठ नागरिक संगठनों ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि चुनावी घोषणा-पत्रों में बुजुर्गों की स्वास्थ्य सेवा, पेंशन और देखभाल जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए। राहुल गांधी ने केरल रैलियों में वादा किया ‘अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग मंत्रालय बनेगा और उनकी पेंशन ₹3000 प्रतिमाह की जाएगी।’

बढ़ती उम्रदराज आबादी के साथ राज्य को इन चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। 9 अप्रैल को जब केरल के 140 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा, तो मतदान केंद्रों और घरों में इन बुजुर्ग मतदाताओं की मौजूदगी याद दिलाएगी कि लोकतंत्र हर उम्र के लिए है और असली ताकत अनुभव और दृढ़ संकल्प से आती है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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