खेल डेस्क। भारतीय घरेलू क्रिकेट में नया इतिहास रचते हुए जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया। फाइनल मुकाबले में आठ बार की चैंपियन कर्नाटका के खिलाफ मैच ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी में विशाल 291 रन की बढ़त के आधार पर जम्मू-कश्मीर को विजेता घोषित किया गया।
हब्बल्ली के KSCA राजनगर स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले के साथ ही जम्मू-कश्मीर रणजी ट्रॉफी जीतने वाली भारत की 19वीं टीम बन गई।
हाल के वर्षों में विदर्भ और मध्य प्रदेश जैसी टीमों के उभार के बाद जम्मू-कश्मीर की यह जीत भारतीय घरेलू क्रिकेट के बदलते संतुलन को दर्शाती है, जहां पारंपरिक दिग्गजों के साथ नई टीमें भी चैंपियन बन रही हैं।
फाइनल में जम्मू-कश्मीर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए पहली पारी में 584 रन बनाए, जो इस सीजन का उसका सर्वाधिक स्कोर रहा। शुभम पुंडीर और कमरान इकबाल ने अहम मौके पर शतक जड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। चोटिल खिलाड़ियों की अनुपस्थिति के बावजूद टीम ने दबाव नहीं दिखाया और पूरे मैच में नियंत्रण बनाए रखा।
तेज गेंदबाज औकिब नबी ने कर्नाटक की मजबूत बल्लेबाजी को झकझोर दिया। पहली पारी में 54 रन देकर 5 विकेट लिए, जिससे जम्मू कश्मीर की टीम को पहले विकेट में बढ़त लेने में कामयाबी मिली। औकिब नबी पूरे टूर्नामेंट में 60 विकेट लेकर सबसे सफल गेंदबाज बने। उनके लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय टीम में चयन की मांग भी तेज हो गई है।
मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज अब्दुल समद ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 748 रन बनाए और टीम के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने। लंबे समय से प्रतिभाशाली माने जा रहे समद ने इस सीजन में खुद को साबित किया।
41 वर्षीय कप्तान पारस डोगरा के लिए यह खिताब बेहद खास रहा। 153 प्रथम श्रेणी मैच खेलने वाले अनुभवी खिलाड़ी जिन्होंने रणजी ट्रॉफी में 10,000 से ज्यादा रन बनाए का पहला खिताब है। लंबे घरेलू करियर का पहला रणजी खिताब है।
जम्मू-कश्मीर इससे पहले तीन बार क्वार्टरफाइनल (2013-14, 2019-20, 2024-25) तक पहुंचा था। पिछले सीजन में सेमीफाइनल की दौड़ से सिर्फ एक रन की पहली पारी बढ़त से बाहर होना पड़ा था। इस बार टीम ने उसी दर्द को जीत में बदल दिया।
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