लेंस डेस्क। भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक रिश्तों में एक और अध्याय जुड़ गया है। मास्को स्थित ‘भारत मित्र समाज’ ने रूसी साहित्य को भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने वाले अनुवादकों के लिए पहली बार ‘आन्ना अख़मातोवा सम्मान’ देने का ऐलान किया है। प्रतिवर्ष दिया जाने वाला यह विशेष सम्मान रूसी कवयित्री आन्ना अख़मातोवा की स्मृति में समर्पित है।
साल 2026 में इस सम्मान के लिए हिंदी के दो वरिष्ठ कवियों और अनुवादकों सुधीर सक्सेना और लीलाधर मंडलोई का चयन किया गया है। यह निर्णय भारत मित्र समाज के निर्णायक मंडल ने सर्वसम्मति से लिया, जिसमें रूसी भारतविद् अलिक्सान्दर सेंकेविच, कवयित्री ततियाना फ़िलिपवा, कथाकार रमान सेनचिन, कथाकार ज़ख़ार प्रिलेपिन, कवि ईगर सीद और भारत मित्र समाज के महासचिव अनिल जनविजय शामिल थे।
हिंदी कवि सुधीर सक्सेना पिछले 50 वर्षों से रूसी कविता के अनुवाद में सक्रिय हैं। उन्होंने सबसे पहले हिंदी में आन्ना अख़मातोवा की कविताओं को पाठकों तक पहुंचाया। इसके अलावा येगोर इसायेफ़, ओसिप मंदिलश्ताम, येव्गेनी येफ़्तुशेंका, कैसिन कुलिएफ़ और ओलगा ख़रलामवा जैसे प्रमुख रूसी कवियों की रचनाओं को बड़े पैमाने पर हिंदी में उपलब्ध कराने में उनकी अहम भूमिका रही है। 1955 में उत्तर प्रदेश में जन्मे सुधीर सक्सेना के अब तक आठ कविता संग्रह और रूसी कविता के अनुवादों की सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें 1997 में रूस का प्रतिष्ठित पूश्किन सम्मान भी मिल चुका है। वर्तमान में वे भोपाल में रहते हैं।
इसी तरह वरिष्ठ कवि लीलाधर मंडलोई ने भी रूसी कविता को हिंदी में प्रस्तुत करने का सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने अनतोलि परपरा, बोरिस पस्तिरनाक, इवान बूनिन, कंसतन्तिन बलिमोन्त, ज़िनअईदा गीप्पिउस, सामुइल मरशाक, व्लदीमिर बूरिच और विचिस्लाफ़ कुप्रियानफ़ जैसे दुर्लभ एवं प्रसिद्ध रूसी कवियों की कविताओं का अनुवाद किया है।
लीलाधर मंडलोई को भी 2002 में रूस का पूश्किन सम्मान प्राप्त हो चुका है। इसके अलावा उन्हें कबीर सम्मान, रज़ा सम्मान, नागार्जुन पुरस्कार, शमशेर सम्मान और दुष्यन्त अलंकरण जैसे कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। फिलहाल वे रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल में विश्वरंग साहित्यिक कार्यक्रम के सह-निदेशक हैं और दिल्ली में निवास करते हैं।
भारत मित्र समाज के महासचिव अनिल जनविजय ने इस सम्मान की घोषणा करते हुए कहा कि यह पुरस्कार रूसी और भारतीय साहित्य के बीच गहरे संबंधों को मजबूत करने और अनुवादकों के योगदान को मान्यता देने का प्रयास है। यह पहल भारत-रूस सांस्कृतिक आदान-प्रदान की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ती है, जहां साहित्य के माध्यम से दोनों देशों के बीच दोस्ती और समझ को और गहरा किया जा सकेगा।











