नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
India-EU Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने मंगलवार को एक लंबे समय से प्रतीक्षित और ऐतिहासिक व्यापार समझौता पर सहमति जताई है, जिसका उद्देश्य दो-तरफ़ा व्यापार को बढ़ावा देना और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उभरते तनाव के बीच अमेरिका पर निर्भरता को कम करना है।
रायटर्स के अनुसार इस समझौते के तहत, व्यापार मूल्य के आधार पर 96.6 वो वस्तुएँ जिनका यूरोपीय यूनियन भारत में निर्यात करता है, उन पर टैरिफ या तो खत्म हो जाएंगे या कम कर दिए जाएंगे, जिससे यूरोपीय कंपनियों को सालाना लगभग 4 बिलियन डॉलर टैक्स में बचत होने की उम्मीद है।
EU भी भारत से आयात होने वाली 99.5फीसदी वस्तुओं पर अपने टैरिफ कम करेगा, जिसमें समुद्री उत्पाद, वस्त्र, रसायन, रबर, बेस मेटल और गहने शामिल हैं और इन पर 7 साल के भीतर टैक्स को शून्य तक लाया जाएगा।
समझौते में संवेदनशील कृषि उत्पाद जैसे सोया, बीफ़, चीनी, चावल और डेयरी को शामिल नहीं किया गया है।भारत की कड़ाई से संरक्षित बाज़ार को खोलते हुए, इस डील के अंतर्गत भारत कारों के आयात पर 110% तक के टैरिफ को 10% तक घटाएगा, जिससे यूरोपीय ऑटो उत्पादकों को भारत में बेहतर पहुंच मिलेगी।यह समझौता अभी कानूनी समीक्षा और अनुमोदन के अधीन है और इसे लागू होने में लगभग एक साल का समय लग सकता है।
India-EU Trade Deal: समझौते में क्या है खास
भारत और यूरोपीय संघ ने आज 18 साल लंबी बातचीत के बाद आखिरकार एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर मुहर लगा दी है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” यानी सभी सौदों की मां करार दिया है
उम्मीद लगाई जा रह है कि यह समझौता दो अरब लोगों के बाजार को जोड़ेगा और दोनों पक्षों के लिए लाखों नौकरियां पैदा करेगा। इसके साथ ही सुरक्षा-रक्षा सहयोग और भारतीय प्रतिभाओं की यूरोप में गतिशीलता पर भी दो महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं।
अगले पांच साल के लिए एक संयुक्त रणनीतिक एजेंडा भी तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट बताया है। उन्होंैने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत-यूरोप की साझेदारी स्थिरता लाएगी, निवेश बढ़ाएगी और सप्लाई चेन को मजबूत करेगी।











