I-PAC छापेमारी मामला: सुप्रीम कोर्ट की ममता को खरी-खरी, ‘केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई में राज्य का हस्तक्षेप गंभीर मुद्दा’

March 19, 2026 10:21 AM
I-PAC raid case

लेंस डेस्‍क। I-PAC raid case: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी में दखलंदाजी को लेकर गंभीर टिप्पणियां की हैं। अदालत ने माना कि केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई में राज्य स्तर से हस्तक्षेप एक गंभीर मुद्दा है, जिससे जांच की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है और यदि ऐसे मामलों पर रोक न लगाई गई तो देश में अराजकता फैलने का खतरा है।

यह विवाद इसी साल जनवरी में कोलकाता में राजनीतिक परामर्श कंपनी I-PAC के दफ्तर और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर ED की तलाशी से जुड़ा है। ईडी के अनुसार यह छापेमारी अवैध कोयला तस्करी (कोल पिल्फरेज स्कैम) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई थी।

ED का दावा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ, और उन्होंने लैपटॉप, मोबाइल फोन तथा कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने साथ ले लिए, जिससे जांच में बाधा पहुंची और सबूतों के साथ छेड़छाड़ हुई। एजेंसी ने इसे सत्ता के दुरुपयोग और जांच में अवैध हस्तक्षेप करार दिया है।

ED ने सुप्रीम कोर्ट से इस घटना की CBI से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा, राज्य पुलिस द्वारा ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक लगाने की भी गुहार लगाई गई। अदालत ने ED की याचिका पर ममता बनर्जी, राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। साथ ही, ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर अंतरिम रोक लगा दी है और घटनास्थल के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।

दूसरी ओर ममता बनर्जी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि ED की यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध की बानगी है और लोकसभा या विधानसभा चुनावों से पहले TMC पर दबाव बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उनकी ओर से पेश वकीलों ने अदालत में दावा किया कि मुख्यमंत्री ने केवल पार्टी से जुड़े संवेदनशील डेटा को सुरक्षित करने के लिए कदम उठाया और कोई सबूत नहीं छीना गया, जैसा कि ED के अपने पंचनामा से साबित होता है।

मामले की सुनवाई आगे बढ़ रही है, जिसमें फरवरी 2026 में कई बार स्थगन के बाद भी बहस जारी है। ED ने इसे “अभूतपूर्व और चौंकाने वाली” घटना बताया है, जबकि पश्चिम बंगाल सरकार का कहना है कि ED को राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए हथियार बनाया जा रहा है।

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