दुनिया की सबसे बड़ी इंटरनेट डोमेन विक्रेता कंपनी GoDaddy ने चेतावनी दी है कि भारत द्वारा प्रसिद्ध ब्रांड्स की नकल करने वाली फर्जी वेबसाइटों पर की जा रही कार्रवाई वैध व्यवसायों के लिए इंटरनेट को कम सुरक्षित बना देगी और इसका वैश्विक प्रभाव पड़ेगा।भारत में स्मार्टफोन और इंटरनेट के उपयोग में तेजी के साथ ऑनलाइन फ्रॉड की समस्या भी बढ़ गई है।
दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाले इस देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। पिछले साल सरकार को कथित साइबर फ्रॉड के 24 लाख शिकायतें मिलीं, जिनकी कुल राशि 24 अरब डॉलर थी। एक दिन पहले साइबर फ्राड का शिकार भाजपा के सांसद संबित पात्रा भी हुए थे।
भारत में क्या क्या बने नए नियम
न्यूज एजेंसी रायटर्स के अनुसार दरअसल नामचीन वेबसाइट के नाम से मिलते जिले डोमेन को लेकर 2019 से शुरू होकर दर्जनों भारतीय और वैश्विक कंपनियों ने मुकदमे दायर किए । अमेज़न ने अपने नाम पर चल रही फर्जी शॉपिंग साइट्स के खिलाफ, जबकि मैकडॉनल्ड्स ने फर्जी फ्रैंचाइजी ऑफर करने वाली साइट्स के खिलाफ। दिसंबर में एक भारतीय अदालत ने 1,100 से अधिक ऐसी वेबसाइट्स को ब्लॉक कर दिया।
नई दिल्ली की अदालत ने इससे आगे जाकर व्यापक नए उपायों के आदेश दिए, जिन्हें तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इससे इंटरनेट गवर्नेंस के नियम ही बदल गए हैं। नए नियमों के तहत डोमेन विक्रेताओं को खरीदारों को डिफॉल्ट रूप से मुफ्त प्राइवेसी प्रोटेक्शन नहीं देने को कहा गया।खरीदार की डिटेल्स किसी भी व्यक्ति को 72 घंटे के अंदर उपलब्ध कराने की बात थी।साथ ही संरक्षित ब्रांड नामों के वेरिएशन्स वाली वेबसाइट एड्रेस प्रतिबंधित करने का भी प्रावधान है।
क्या है GoDaddy का तर्क
अमेरिका स्थित GoDaddy ने दिल्ली हाईकोर्ट की बड़ी बेंच में इन निर्देशों को चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि यह फैसला उन वैध व्यवसायों को प्रभावित करेगा जिनके नाम बड़े ब्रांड्स से मिलते-जुलते हैं।GoDaddy ने कहा कि डिफॉल्ट प्राइवेसी सुविधा बंद करने से वैध वेबसाइट मालिकों का नाम, पता, फोन नंबर और ईमेल सार्वजनिक हो जाएगा, जिससे स्टॉकिंग और उत्पीड़न जैसे “पूर्वानुमानित प्राइवेसी और सुरक्षा जोखिम” पैदा होंगे।चूंकि डोमेन नाम वैश्विक स्तर पर काम करते हैं, न कि स्थानीय, इसलिए यह आदेश GoDaddy को दुनिया भर में वेबसाइट एड्रेस को रेगुलेट करने के लिए मजबूर कर सकता है।
भारत से निकल सकती हैं डोमेन कंपनियां
72 घंटे की समयसीमा वाले आदेश पर GoDaddy का तर्क है कि उसके पास यह आंकने की कोई क्षमता नहीं है कि किसे वैध हित है और किसे नहीं।कंपनी के अपील दस्तावेज जिसके 5,121 पृष्ठ हैं में कहा गया है कि ये व्यावसायिक रूप से अस्थिर करने वाले निर्देश डोमेन नाम कंपनियों को भारत से बाहर निकलने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के इंजन
GoDaddy की सालाना आय 50 अरब डॉलर है। कंपनी 8 करोड़ डोमेन प्रबंधित करती है और 2 करोड़ से अधिक यूजर्स को सेवा देती है। 2024 में कंपनी के अधिकारियों ने कहा था कि भारत उभरते बाजारों में उसका सबसे बड़ा क्षेत्र है।GoDaddy की प्रतिद्वंद्वी कंपनियां एरिजोना स्थित Namecheap और नीदरलैंड्स स्थित Hosting Concepts ने भी नई दिल्ली के फैसले को चुनौती दी है, हालांकि उनके अपील की विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकी।
20 से ज्यादा कंपनियों ने दायर किया मुकदमा
यह कानूनी विवाद 20 से अधिक कंपनियों द्वारा दायर मुकदमों से शुरू हुआ, जिनमें Amazon, McDonald’s, Microsoft, Xiaomi और Colgate-Palmolive शामिल हैं।दिसंबर के फैसले में कहा गया कि फर्जी वेबसाइटें “बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के इंजन” हैं।अदालत के 14 उपायों में एक यह था कि डोमेन खरीदार की रजिस्ट्रेशन डिटेल्स छिपाने की सुविधा अब केवल पैसे लेकर दी जाए, क्योंकि यह “दुष्ट ऑपरेटरों की पहचान छिपाने का आवरण” बन जाती है।फैसले के बावजूद GoDaddy की वेबसाइट अभी भी “फॉरएवर फ्री प्राइवेसी प्रोटेक्शन” का प्रचार कर रही है।
निजता के उल्लंघन का तर्क
GoDaddy का तर्क है कि प्राइवेसी सुविधा कमजोर करने से भारत के डेटा प्रोटेक्शन कानून और यूरोपीय संघ के GDPR का उल्लंघन होगा, जो डिफॉल्ट प्राइवेसी की वकालत करते हैं।न्यूयॉर्क स्थित इंटरनेट गवर्नेंस शोधकर्ता Farzaneh Badii ने नई दिल्ली के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यूरोप में ऐसे विवरण छिपाए जाते हैं क्योंकि उन्हें प्रकाशित करने का दुरुपयोग उत्पीड़न और फिशिंग के लिए होता है।जिन लोगों का विवरण सार्वजनिक होगा वे पत्रकार, कार्यकर्ता, छोटे व्यवसायी और निजी व्यक्ति होंगे। ब्रांड नकल करने वाले नहीं।”McDonald’ एक आम नाम है।
सरकार द्वारा हर 37 सेकेंड में एक साइबर फ्राड का दावा
GoDaddyमोदी सरकार के गृह मंत्री अमित शाह ने इस साल कहा था कि भारत में हर 37 सेकंड में एक व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार होता है और कार्रवाई न करने से यह “राष्ट्रीय संकट” बन सकता है।दिसंबर के व्यापक निर्देश अदालत द्वारा जारी किए गए थे, लेकिन सरकारी दाखिलों के बाद।GoDaddy के अपील दस्तावेजों में शामिल आईटी मंत्रालय का 2023 का 59 पृष्ठों का एक गैर-रिपोर्टेड दस्तावेज दिखाता है कि सरकार ने जज को “डोमेन नाम दुरुपयोग” और “सख्त वेरिफिकेशन की कमी” की चिंता बताई थी।
गृह मंत्रालय ने कहा कि जांच के लिए रजिस्ट्रेशन डिटेल्स “तुरंत उपलब्ध” होनी चाहिए।McDonald’s के मामले में कंपनी ने 110 वेबसाइट्स के खिलाफ कार्रवाई मांगी थी, जिनमें कुछ गोल्डन आर्चेस लोगो का इस्तेमाल कर फर्जी फ्रैंचाइजी बेच रही थीं।










