गाजियाबाद में तीन बहनों की खुदकुशीः ऑनलाइन गेमिंग के संजाल को रोकिए

February 4, 2026 8:46 PM
Ghaziabad Three sisters suicide

राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद में एक आवासीय परिसर में रहने वाले एक परिवार की तीन नाबालिग बहनों के कथित तौर पर मोबाइल फोन पर चलने वाले कोरियन गेम की जद में आकर आत्महत्या कर लेन की घटना बेहद दर्दनाक होने के साथ ही देश में बढ़ते ऑनलाइन गेम को लेकर गंभीर चेतावनी भी है।

मंगलवार तड़के ढाई बजे एक आवासीय परिसर की नौंवी मंजिल पर स्थित फ्लैट की बॉलकनी से कूदकर जान देने वाली 12, 14 और 16 साल की तीन बहनों के बारे में पता चला है कि उन्हें कोरियन गेम की लत थी। उनके माता-पिता ने कुछ दिनों पहले उनके मोबाइल फोन भी छीन लिए थे। बताया जा रहा है कि वे पढ़ाई में कमजोर थीं, इसलिए उन्हें दो सालों से स्कूल भी नहीं भेजा जा रहा था! यही नहीं, उन्हें अक्सर घर में कैद रखने की जानकारी भी सामने आई है।

दरअसल इस घटना से संबंधित अभी पूरे ब्यौरे और उनकी मौत की असली वजह आना बाकी है, लेकिन जो जानकारियां सामने आई हैं, वह सामाजिक और पारिवारिक जटिलताओं को भी उजागर करती हैं।

उन लड़कियों के पिता ने कुछ बरसों के अंतराल में दो सगी बहनों से शादियां की थीं, जिनसे पांच बच्चे हुए। इनमें से दो लड़कियां दूसरी पत्नी और एक लड़की पहली पत्नी से हुई थी।

लेकिन इस सारे मामले में कोरियन गेम का जिक्र आया है और उन बच्चियों के घर से मिले सुसाइड नोट में भी इसका जिक्र बताया जाता है। यह बेहद चिंता की बात होनी चाहिए कि ऑनलाइन गेमिंग ने बेहद खतरनाक तरीके से किशोरवय बच्चों के दिमाग में न केवल जगह बना ली है, उन्हें अपनी जान तक देने को मजबूर कर दे रहे हैं।

गाजियाबाद की इस घटना के साथ ही मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी एक 14 वर्षीय स्कूली बच्चे के ऑनलाइन गेम की लत के कारण खुदकुशी कर लेने की घटना बताती है कि इस पर तुरंत कोई सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

बेशक, सरकार ने पिछले साल एक अक्टूबर को नया प्रमोशन ऐंड रेगुलेशनऑफ ऑनलाइन गेमिंग कानून लागू किया है, जिसका संबंध आमतौर पर जुआ या सट्टे पर रोक लगाने से है। लेकिन बच्चों की खतरनाक ऑनलाइन गेमिंग तक पहुंच रोकने के बारे में ऐसी कोई सख्ती नजर नहीं आ रही है।

ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल ही 16 साल तक के बच्चों के लिए किसी भी तरह के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। स्पेन सहित कुछ अन्य देशों ने भी ऐसे संकेत दिए हैं। ऐसे कदम भारत में क्यों नहीं उठाए जा सकते?

मोबाइल फोन आज की जरूरत हैं, लेकिन उन तक छोटे-छोटे बच्चों की जैसी पहुंच हो गई है वह बेहद खतरनाक साबित हो रही है। दरअसल कोरोना और लॉकडाउन के समय ऑनलाइन पढ़ाई ने बच्चों की मोबाइल फोन तक पहुंच बढ़ा दी थी, लेकिन यह कितना खतरनाक साबित हुआ है, यह गाजियाबाद की घटना में देखा जा सकता है, जहां पता चला है कि उन बच्चियों को कोरोना के समय ही मोबाइल फोन देखने की लत लग गई थी।

दुखद यह है कि मुद्दा सरकार और संसद की प्राथमिकता में भी नजर नहीं आता। याद किया जा सकता है कि कोरोना काल में जब ब्लू व्हेल और पबजी जैसे ऑनलाइन गेम की चपेट में आकर कुछ बच्चों ने खुदकुशी कर ली थी, तब उन पर प्रतिबंध लगाए गए थे।

जाहिर है, यह मामला बच्चों की बेहतर परवरिश से तो जुड़ा हुआ है ही, लेकिन सरकार और संसद की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को मौत की ओर धकेलने वाले ऐसे सामानों से दूर करने के लिए कड़ाई से कोई कदम उठाएं।

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