लेंस डेस्क । नेपाल की राजधानी काठमांडू में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (Balen Shah) के खिलाफ युवाओं का आंदोलन तेज हो गया है। पिछले तीन दिनों में तीन युवाओं ने आत्मदाह का प्रयास किया, जिनमें से दो की मौत हो गई है। युवा अब बालेन शाह के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनों की सबसे बड़ी वजह नदी किनारे बनी अवैध बस्तियों को हटाने का बालेन सरकार का अभियान है। जब बालेन शाह काठमांडू के मेयर थे, तब से वे इस काम को पूरा करना चाहते थे।
सरकार ने नदी किनारे बसी इन बस्तियों पर कार्रवाई शुरू की है। पुलिस और सेना की मदद से सैकड़ों झुग्गी-झोपड़ियां तोड़ी जा रही हैं। इससे हजारों गरीब परिवार बेघर हो गए हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
कानून का उल्लंघन?
नेपाल के कानून के अनुसार, लोगों को घर से हटाने से पहले उन्हें रहने की कोई वैकल्पिक जगह देनी जरूरी है। लेकिन बालेन सरकार पर आरोप है कि उन्होंने बिना कोई व्यवस्था किए घर तोड़ दिए। अब तक 2,600 परिवारों के घर गिराए जा चुके हैं, लेकिन सिर्फ 325 परिवारों को अस्थायी शेल्टर दिया गया है। अब सरकार ने इन शेल्टरों को भी खाली करने का आदेश दे दिया है।
सड़कों पर प्रदर्शन
रविवार 12 जुलाई को सैकड़ों लोग सिंहदरबार (सरकारी सचिवालय) के बाहर और माइतीघर मंडला में जमा हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में पोस्टर्स थे, जिन पर लिखा था —
‘गरीबों पर जुल्म बंद करो’
‘मानवाधिकार का सम्मान करो’
‘बेघर लोगों को रहने की जगह दो’
‘यूनाइटेड नेशनल स्क्वाटर्स फ्रंट’ के बैनर तले प्रदर्शन हो रहे हैं। युवा संगठन Gen Z Nepal ने बालेन शाह पर जनविरोधी और निरंकुश शासन का आरोप लगाया है।
Balen Shah बने थे Gen Z आंदोलन का चेहरा
बालेन शाह को पिछले साल Gen Z आंदोलन का चेहरा माना जाता था। 2025 के प्रदर्शनों में युवाओं ने केपी शर्मा ओली की सरकार गिरा दी थी। इसके बाद 2026 के चुनाव में बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने भारी जीत हासिल की और वे प्रधानमंत्री बन गए। उनके पास संसद में दो-तिहाई बहुमत है लेकिन अब उसी Gen Z वर्ग से उनका विरोध हो रहा है। विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने भी सरकार पर युवाओं में उम्मीद तोड़ने का आरोप लगाया है।
2023 में जब प्रेम आचार्य नाम के व्यक्ति ने आत्मदाह किया था, तब बालेन शाह (तब मेयर) ने कहा था “यह राज्य की चरम विफलता है।” अब खुद पर लगे इसी आरोप को लेकर वे चुप हैं, जिसकी विपक्ष और प्रदर्शनकारी आलोचना कर रहे हैं।











