रायपुर। छत्तीसगढ़ में समग्र शिक्षा अभियान के तहत GeM पोर्टल (GeM Portal) में जारी टेंडर प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। समान कार्य के लिए अलग-अलग शर्तों के साथ टेंडर जारी होने, देर रात दस्तावेज अपलोड करने और बार-बार अंतिम तिथियों में बदलाव से पूरी निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि समग्र शिक्षा की आयुक्त किरण कौशल ने दावा किया है कि बीआईएस सर्टिफिकेट से खरीदी होगी।
जानकारी के अनुसार, GeM पोर्टल पर जारी टेंडरों में फर्नीचर खरीदी से जुड़े एक ही कार्य के लिए अलग-अलग शर्तें रखी गईं। शुरुआती टेंडर में BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) सर्टिफिकेट को अनिवार्य किया गया था, जबकि कुछ ही घंटों बाद संशोधित बिड जारी कर उसमें BIS की जगह ISO 9001 सर्टिफिकेट की शर्त जोड़ दी गई।
दस्तावेजों के अनुसार, 27 मार्च को टेंडर क्रमांक 7398557 जारी किया गया था, जिसमें 42,858 पीस फर्नीचर की खरीद के लिए BIS सर्टिफिकेट अनिवार्य था और इसकी ओपनिंग डेट 27 अप्रैल तय की गई थी। इसी दिन दूसरा टेंडर क्रमांक 7398617 जारी हुआ, जिसमें समान मात्रा के लिए BIS की जगह ISO 9001 सर्टिफिकेट की शर्त रखी गई। बाद में इसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर 4 मई कर दी गई।
इसके अलावा 30 मार्च को टेंडर क्रमांक 7403883 भी जारी किया गया, जिसमें भी ISO सर्टिफिकेट की शर्त शामिल की गई थी। इस टेंडर की बिड शुरू होने की तारीख 30 मार्च और अंतिम तिथि 29 अप्रैल थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 6 मई कर दिया गया।
इस पूरे मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि जब भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा 13 फरवरी 2025 को जारी गजट नोटिफिकेशन में BIS मानकों को अनिवार्य करने का प्रावधान किया गया है, तो छत्तीसगढ़ में ISO को क्यों लागू किया गया?
नियमों के अनुसार BIS अनिवार्यता में सीमित छूट केवल उन्हीं छोटे उद्यमों को मिलती है जिनका निवेश 25 लाख रुपये से कम और टर्नओवर 2 करोड़ रुपये से कम हो, जबकि इस टेंडर में बिडर का टर्नओवर लगभग 7.5 करोड़ रुपये रखा गया है।
इसके अलावा टेंडर शर्तों में 19-20 हजार फर्नीचर सप्लाई का अनुभव जैसी कठोर शर्तों को लेकर भी MSME को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
आधी रात टेंडर कहां से जारी हुआ?
इसके अलावा टेंडर के GeM पोर्टल में अपलोड की टाइमिंग भी सवालों के घेरे में हैं। पहले टेंडर का संशोधित टेंडर जिसका टेंडर क्रमांक 7398617 है, को 27 मार्च को रात 11:52 बजे जारी किया गया।
इसके अलावा 30 मार्च को फर्नीचर खरीदी के लिए जारी दूसरे टेंडर जिसका टेंडर क्रमांक 7403883 है, को रात 10:08 बजे अपलोड किया गया। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और प्रक्रिया की टाइमिंग पर सवाल उठने लगे हैं।
इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं कि रात को 11.52 बजे क्यों अपलोड किया गया? क्या सिस्टम किसी हड़बड़ी में था? यह अपलोड रात में किस आई पी से किया गया? यदि सरकारी दफ्तर के आईपी से हुआ तो क्या कार्यालय रात को खुला था? यदि रात में कार्यालय खुला था तो उसकी कोई अनुमति थी? और अगर यदि रात में दफ्तर नहीं खुला था तो क्या सरकारी आईपी किसी के निजी घर या दफ्तर से आपरेट हुई? या किसी निजी आईपी का इस्तेमाल किया गया?
रात में टेंडर अपलोड की आयुक्त को जानकारी नहीं
विवाद बढ़ने के बाद समग्र शिक्षा की आयुक्त किरण कौशल से जब द लेंस ने पक्ष जानने की कोशिश की, तो उन्होंने कहा कि टेंडर में ISO की जगह अब संशोधन कर BIS अनिवार्य कर दिया गया है और आगे की प्रक्रिया BIS सर्टिफिकेट के आधार पर ही की जाएगी। रात में टेंडर अपलोड होने की जानकारी पर आयुक्त ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
विभागीय स्तर पर फिलहाल संशोधित प्रक्रिया लागू करने की बात कही जा रही है, लेकिन अब तक सभी संशोधित दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इससे पारदर्शिता और प्रक्रिया की वैधता को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।










