रायपुर। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सचिव 2004 बैच के IAS अमित कटारिया के बीच चल रहे विवाद में भाजपा नेता लगातार बृजमोहन अग्रवाल के समर्थन में उतर रहे हैं। उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बाद अब भाजपा की कद्दावर नेता मध्यप्रदेश की पूर्व सांसद और पूर्व कैबिनेट मंत्री जयश्री बनर्जी ने भी बृजमोहन अग्रवाल के आरोपों का समर्थन किया है।
जयश्री बैनर्जी ने 5 अगस्तर 2026 लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अमित कटारिया के खिलाफ निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने न केवल बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत का समर्थन किया है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग में रहते हुए 108 एंबुलेंस सेवा के टेंडर में कथित अनियमितताओं की भी जांच कराने की मांग उठाई है।
लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में जयश्री बनर्जी ने लिखा कि विभिन्न समाचार माध्यमों से उन्हें जानकारी मिली कि रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने IAS अमित कटारिया के खिलाफ गंभीर शिकायत की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस मामले में लोकसभा सचिवालय ने भी तथ्यात्मक जानकारी तलब की है।
जयश्री बनर्जी ने कहा कि अपने लगभग चार दशक के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने हमेशा जनहित, पारदर्शिता और सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसलिए यह मामला लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा हुआ है।
अपने पत्र में जयश्री बनर्जी ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने लिखा कि स्वास्थ्य विभाग में अमित कटारिया के कार्यकाल के दौरान 108 एंबुलेंस सेवा के टेंडर में नियमों की अनदेखी, कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप भी चर्चा में रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि इन आरोपों में तथ्य हैं तो यह बेहद गंभीर विषय है, क्योंकि इसका सीधा संबंध आम नागरिकों की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा है।
जयश्री बनर्जी ने अपने पत्र में लोकसभा अध्यक्ष से तीन प्रमुख मांगें की हैं। इनमें सांसद बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत और उससे जुड़े समाचारों का संज्ञान लेने, अमित कटारिया के खिलाफ लगाए गए आरोपों, विशेष रूप से स्वास्थ्य विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा के टेंडर से जुड़े मामलों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने और यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार सिद्ध होता है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग है।
उन्होंने पत्र के अंत में कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और जनहित की रक्षा के लिए इस मामले में आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत 20 मई 2026 को हुई थी। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का आरोप है कि स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने फोन पर उनसे ‘जो करना है कर लो’ कहा।
बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि वे लंबे समय से जनहित के मामलों में भेजे गए पत्रों और स्मरण पत्रों का जवाब नहीं मिलने से नाराज थे। उनके मुताबिक, यह एक निर्वाचित सांसद के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया था।
इसके अगले दिन 21 मई को उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक शिकायत भेजते हुए कहा कि यह आचरण संविधान के अनुच्छेद-105 के तहत सांसद के विशेषाधिकार का हनन है और केंद्र सरकार के प्रोटोकॉल दिशा निर्देशों का उल्लंघन भी है।
इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय को पत्र भेजकर मामले पर अंग्रेजी और हिंदी, दोनों भाषाओं में ‘फैक्चुअल नोट’ अविलंब उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि इसे लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष रखा जा सके। सचिवालय ने यह भी पूछा है कि क्या इस नोट की एक प्रति सांसद को भी दी जा सकती है।
मामला पहुंचा लोकसभा, लेंस के खुलासे के बाद गरमाई राजनीति
इस मामले का खुलासा सबसे पहले द लेंस ने अपने एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में किया। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने राज्य सरकार से तथ्यात्मक जानकारी मांगी और विवाद राजनीतिक मुद्दा बन गया।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार केवल सांसद का ही नहीं, बल्कि उन्हें चुनने वाले मतदाताओं का भी अपमान है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने इसे प्रदेश में ‘बेलगाम नौकरशाही’ का उदाहरण बताया। वहीं उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी कहा कि अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों का सम्मान करना चाहिए और उनकी बातों को गंभीरता से लेना चाहिए।
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