सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बर्खास्त प्रोफेसर की वापसी, नए कुलपति के आने के बाद नियुक्ति बहाली पर उठे सवाल

रायपुर। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में एक बार फिर विवादों के घेरे में है। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहिद अली, जिनकी सेवाएं Supreme Court के आदेश के बाद 2024 में समाप्त कर दी गई थीं, अब दोबारा कॉलेज जॉइन कर चुके हैं। यह बहाली नए कुलपति प्रोफेसर मनोज दयाल के आने के तुरंत बाद हुई है जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय, रायपुर में डॉ. शाहिद अली की दोबारा नियुक्ति ने कैंपस में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 2024 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सेवा समाप्त होने के दो साल बाद उनकी अब बहाली हो गई है। छात्र और कर्मचारी अब पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

जानें क्या है पूरा मामला ?

डॉ. शाहिद अली पर पहले फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र और दस्तावेज जमा करने के आरोप लगे थे। विश्वविद्यालय के ही एक अन्य एसोसिएट प्रोफेसर ने इन आरोपों की शिकायत की थी। आरोप था कि नियुक्ति के समय दिए गए कुछ कागजात संदिग्ध थे। इन आरोपों के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने जुलाई 2023 में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। डॉ. शाहिद अली ने इस फैसले के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। फरवरी 2024 में हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और बर्खास्तगी आदेश रद्द कर दिया लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय के पक्ष को मजबूती दी और हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। इसके बाद डॉ. शाहिद अली की सेवा आधिकारिक रूप से समाप्त कर दी गई थी।

दो साल बाद अचानक वापसी से उठे सवाल

नए कुलपति प्रो. मनोज दयाल के कार्यभार संभालने के बाद 13 मई 2026 को डॉ. शाहिद अली की सेवा बहाल करने का आदेश जारी किया गया। इस फैसले से कैंपस में हलचल मच गई है। छात्र और कर्मचारी पूछ रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बहाली का आधार क्या है? क्या कोर्ट ने अपना पुराना फैसला बदला है? शासन स्तर से कौन सी मंजूरी ली गई? पूरी नोटशीट और प्रक्रिया क्यों सार्वजनिक नहीं की जा रही?

विश्वविद्यालय प्रशासन अभी तक इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाया है। छात्रों का कहना है कि अगर सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो पूरी फाइल सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?

छात्रों में गुस्सा, आंदोलन की तैयारी

कई छात्र संगठनों ने इस बहाली को बैकडोर एंट्री बताया है। उनका आरोप है कि बिना पारदर्शी प्रक्रिया के यह फैसला लिया गया है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि बहाली से संबंधित सभी दस्तावेज और स्वीकृतियां तुरंत सार्वजनिक की जाएं। कैंपस में कार्यरत कुछ अन्य प्रोफेसरों के अनुसार, पिछले 15 दिनों से छात्र बार-बार जानकारी मांग रहे हैं लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। अब वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं।

दरअसल कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ का प्रमुख मीडिया शिक्षा केंद्र है। पिछले कुछ वर्षों में यहां कुलपति बदलने के साथ ही कई प्रशासनिक विवाद सामने आए हैं। डॉ. शाहिद अली का मामला भी पुराना है। उन्होंने पहले तत्कालीन कुलपति बलदेव भाई शर्मा की योग्यता पर भी सवाल उठाए थे जिसके बाद यह पूरा विवाद और गहराया। इस खबर को लिखे जाने तक विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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