रायपुर। चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) से संबद्ध डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ (Diocese of Chhattisgarh) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के संयोजक अरुण पन्नालाल के दावों को निराधार बताते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डायोसिस ने कहा कि अरुण पन्नालाल किसी भी अधिकृत चर्च निकाय के प्रतिनिधि नहीं हैं, फिर भी वे स्वयं को मसीही समाज का राष्ट्रीय प्रतिनिधि बताकर बयानबाजी कर रहे हैं।
डायोसिस के सचिव नितिन लॉरेंस ने स्पष्ट किया कि चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया की प्रशासनिक और धार्मिक व्यवस्था एक विधिवत संवैधानिक प्रक्रिया के तहत संचालित होती है। किसी भी व्यक्ति को अध्यक्ष या प्रतिनिधि के रूप में मान्यता केवल निर्धारित प्रक्रिया से ही मिलती है।
प्रेस वार्ता में बताया गया कि अरुण पन्नालाल का किसी अधिकृत चर्च निकाय से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व के उनके दावे भी तथ्यहीन हैं।
डायोसिस के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर स्वयं को मसीही समाज का प्रतिनिधि बताना भ्रामक है, जिससे समुदाय की छवि धूमिल हो सकती है।
ट्रंप को पत्र लिखने और प्रतिनिधिमंडल भेजने का दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक वीडियो का हवाला दिया गया, जिसमें अरुण पन्नालाल यह दावा करते दिखाई दे रहे हैं कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर भारत में प्रतिनिधिमंडल भेजने का अनुरोध किया था और ऐसा प्रतिनिधिमंडल भारत आया भी था। डायोसिस ने इन दावों को गंभीर और भ्रामक बताते हुए कहा कि बिना किसी आधिकारिक हैसियत के इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय दावे करना अनुचित है।
19 स्कूलों पर ‘जबरन कब्जे’ का आरोप, 2.5 करोड़ रुपए फीस पर सवाल
डायोसिस ने आरोप लगाया कि सालेम इंग्लिश स्कूल परिसर सहित प्रदेश के 19 स्कूलों पर जबरन कब्जा कर चार महीनों के भीतर लगभग ढाई करोड़ रुपये की फीस वसूली गई। संस्था का कहना है कि इस राशि का कोई स्पष्ट लेखा-जोखा सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया है।
डायोसिस ने मांग की है कि चार महीनों में एकत्रित फीस का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। डिजिटल और नगद लेन-देन की विधिवत जांच हो। धनराशि के उपयोग का सार्वजनिक खुलासा किया जाए। यदि कोई अनियमितता पाई जाए तो आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।
संस्था के अनुसार फीस की वसूली में पारदर्शिता का अभाव रहा, जिससे अभिभावकों और समुदाय में असमंजस की स्थिति बनी।
आपत्तिजनक भाषा और सामाजिक तनाव पर चिंता
प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि कुछ वीडियो में राष्ट्रीय स्तर के मसीही मॉडरेटर के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जो संस्थागत मर्यादा के विपरीत हैं। डायोसिस ने इसे समुदाय की गरिमा के खिलाफ बताया।
डायोसिस ने रायपुर पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है। साथ ही, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत भी जांच की अपील की गई है।
डायोसिस ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी पर व्यक्तिगत आरोप लगाना नहीं, बल्कि पारदर्शिता और विधिसम्मत जांच सुनिश्चित करना है। संस्था ने सभी समुदायों से सामाजिक सद्भाव, शांति और संवैधानिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
डायोसिस का कहना है कि मसीही समाज की एकता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि प्रतिनिधित्व और वित्तीय प्रबंधन दोनों ही निर्धारित नियमों और पारदर्शिता के दायरे में हों।









