ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने हाल ही में जारी करप्शन पर्सेप्शंस इंडेक्स (Corruption Perceptions Index CPI) 2025 में भारत को 182 देशों की सूची में 91वें स्थान पर रखा है। पिछले साल 96वें स्थान पर रहने वाला भारत इस बार 5 पायदानों की छलांग लगा चुका है और उसका स्कोर 38 से बढ़कर 39 हो गया है। यह छोटा सुधार ई-गवर्नेंस, डिजिटल ट्रैकिंग, रीयल-टाइम ऑडिट और पब्लिक खरीद में पारदर्शिता जैसे कदमों का नतीजा माना जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, CPI स्कोर 13 विश्वसनीय स्रोतों (विश्व बैंक, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, थिंक टैंक्स आदि) से एक्सपर्ट्स की धारणा पर आधारित है, जहां 0 बहुत ज्यादा भ्रष्टाचार और 100 पूरी तरह साफ-सुथरा प्रशासन दर्शाता है।वैश्विक स्तर पर औसत स्कोर 42 पर पहुंचकर पिछले 10 साल का सबसे निचला स्तर है। दुनिया के 122 देशों (दो-तिहाई से ज्यादा) का स्कोर 50 से नीचे है। डेनमार्क (89) लगातार 8वें साल टॉप पर है, उसके बाद फिनलैंड (88) और सिंगापुर (84) हैं।
सबसे ज्यादा भ्रष्ट देशों में साउथ सूडान और सोमालिया (9), वेनेजुएला (10) शामिल हैं। रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि कमजोर संस्थाएं, लोकतंत्र का क्षरण, न्याय व्यवस्था पर राजनीतिक दबाव और पत्रकारों की सुरक्षा में गिरावट से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। 2012 से अब तक गैर-संघर्ष क्षेत्रों में 829 पत्रकारों की हत्या हुई, जिनमें से 90% से ज्यादा कम स्कोर वाले देशों में हुई।
दक्षिण एशिया में भूटान (18वां, स्कोर 71) सबसे बेहतर है, जबकि पाकिस्तान 136वें, नेपाल 76वें, श्रीलंका 107वें और मालदीव-भारत संयुक्त रूप से 91वें स्थान पर हैं। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि भ्रष्टाचार से अस्पतालों में सुविधाएं कम होती हैं, आपदाओं में मदद नहीं पहुंचती और युवाओं के सपने टूटते हैं। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने दुनिया के नेताओं से मजबूत न्याय व्यवस्था, पारदर्शी राजनीतिक फंडिंग, मीडिया की आजादी और गंदे पैसे पर रोक लगाने की अपील की है। भारत ने छोटा कदम बढ़ाया है, लेकिन बड़ा बदलाव तभी संभव है जब पारदर्शिता और जवाबदेही पर सख्ती बरती जाए।











