छत्तीसगढ़ साड़ी खरीदी विवाद: 9.7 करोड़ की सप्लाई पर सवाल, लाभार्थियों से ही गुणवत्ता की कराई जा रही जांच

रायपुर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए खरीदी गई साड़ियों को लेकर विवाद (Chhattisgarh saree purchase controversy) गहराता जा रहा है। छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग ने इसकी खरीदी की थी। और अब करीब 9.7 करोड़ रुपये की लागत से गुजरात के सूरत से सप्लाई की गई साड़ियों में गुणवत्ता और माप को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।

वर्क ऑर्डर के अनुसार साड़ी की लंबाई 6.3 मीटर तय थी, लेकिन कई साड़ियों की लंबाई लगभग 5 मीटर तक कम पाई गई। इसके अलावा कपड़े की गुणवत्ता, रंग की टिकाऊपन और फिनिशिंग को लेकर भी व्यापक शिकायतें सामने आई हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि साड़ियां इतनी पतली और घटिया गुणवत्ता की हैं कि उन्हें पहनना भी मुश्किल हो रहा है और पहली धुलाई में ही रंग फीका पड़ जा रहा है।  कई लाभार्थियों का कहना है कि साड़ी बेहद पतली है, रंग जल्दी उड़ जाता है और सामान्य उपयोग के लायक नहीं है।

इस मामले पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जहां-जहां भी खराब गुणवत्ता की साड़ियाँ वितरित की गई हैं, उन्हें वापस मंगाया जाएगा और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। दोषियों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली और गंभीर बात यह सामने आ रही है कि सप्लायर और खरीद करने वाली एजेंसी—दोनों ने साड़ियों की गुणवत्ता की सही तरीके से जांच नहीं की।

नियमों के अनुसार सप्लाई से पहले गुणवत्ता परीक्षण और फाइनल अप्रूवल होना चाहिए था, लेकिन वह प्रक्रिया विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार की वजह से सही तरह से नहीं पूरी की गई।

हालत यह है कि सप्लाई हो जाने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ही साड़ियों की गुणवत्ता जांचने के लिए निर्देश दिए गए हैं। इस निर्देश ने पूरी व्यवस्था को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।

सवाल इसलिए कि जिन महिलाओं को यह साड़ियां उनके कार्य का प्रोत्साहन थीं, उन्हें ही अब उसकी गुणवत्ता जांचने को कहा जा रहा है।

साड़ियों की सप्लाई की यह पूरी प्रक्रिया ही विवादों में इसलिए है कि 9.7 करोड़ रुपए की सरकारी खरीद गुजरात से की गई। जबकि छत्तीसगढ़ सरकार में ही इन वस्त्रों की खरीदी के अलग विभाग हैं। इसके अलावा सप्लाई के बाद वर्क ऑर्डर से कम लंबाई की साड़ियां, खराब कपड़ा और रंग उड़ने की शिकायत, गुणवत्ता जांच प्रणाली पर सवाल भी हो रहे हैं।

इस खरीदी ने सरकारी सिस्टम, गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने भी पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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