नई दिल्ली। केंद्र सरकार के भारी दबाव के बीच राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी चंपत राय और अनिल मिश्रा (Champat Rai & Anil Mishra) का इस्तीफा हो गया है। इसके कयास बीती रात से ही लगाए जा रहे थे।
इसके पहले राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण की एसआइटी जांच की रिपोर्ट आने और 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के अपने पद से त्यागपत्र दे देने की खबरें प्रसारित होने से हलचल बनी रही। बताया जा रहा है कि यह इस्तीफा केंद्र के दबाव में हुआ है।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री कार्यालय से ट्रस्ट की अब तक की आय-व्यय, बैंक में जमा धनराशि सहित अन्य संपत्तियों से जुड़ा संपूर्ण विवरण भी मांगा गया है।
ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य व राम मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव और विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री कोटेश्वर शर्मा ने दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफे की खबरों को पहले आधारहीन बताया था।
मंदिर व विहिप से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि दोनों पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार के स्तर से मिले निर्देश के बाद इस्तीफा सौंपा है, परंत इसे स्वीकृत करने में 24 घंटे लग गए।
गबन मामले की जांच करके एसआइटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है।इस रिपोर्ट में तीनों पदाधिकारियों सहित मंदिर व्यवस्था से जुड़े लगभग 15 ट्रस्ट कर्मियों व सेवादारों को दोषी माना गया है। एसआइटी के मंगलवार को रिपोर्ट सौंपने के एक दिन बाद गुरुवार की सुबह दोनों ट्रस्टियों के त्यागपत्र दे देने की खबरें सामने आ गईं।
कई समाचार चैनल तो इसे दिन भर प्रसारित करते रहे। इसको लेकर राम मंदिर परिसर ही नहीं, रामसेवकपुरम, कारसेवकपुरम और विहिप व आरएसएस से जुड़े पदाधिकारियों में भी बेचैनी बनी रही।
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