छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का तमनार पर कड़ा रुख, कहा – ‘नहीं चलेगा इंस्टेंट जस्टिस’

January 9, 2026 7:53 PM

CG HIGHCOURT ON TAMNAR CASE: छत्तीसगढ़ में हाल के दिनों में दो बेहद शर्मनाक और दिल दहला देने वाली घटनाओं ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इन घटनाओं पर अब न्यायपालिका ने कड़ा रुख अपनाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने स्पष्ट कहा है कि कानून का मजाक उड़ाने और किसी इंसान की इज्जत से खेलने की किसी को भी कोई छूट नहीं मिलेगी।

रायपुर के अभनपुर थाना क्षेत्र में एक महिला पर ‘टोनही’ और ‘तांत्रिक’ होने का आरोप लगाकर उसे निर्वस्त्र कर गांव में घुमाया गया। पीड़िता ने मजबूर होकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने गहरी नाराजगी जताई और कहा कि ऐसी घटनाएं समाज में डर और असुरक्षा फैलाती हैं, जो बिल्कुल अस्वीकार्य हैं।तमनार की दिल दहला देने वाली घटनाइसी सुनवाई के दौरान रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र की घटना भी कोर्ट के संज्ञान में आई।

27 दिसंबर 2025 को जिंदल पावर लिमिटेड की कोयला खदान के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने एक महिला पुलिस आरक्षक पर हमला किया, उसकी वर्दी फाड़ दी, उसे अर्धनग्न कर अमानवीय व्यवहार किया। यह सब वीडियो में कैद होकर वायरल हो गया जिसने पूरे देश में आक्रोश फैला दिया।इसके जवाब में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर सड़क पर जुलूस निकाला। आरोपी को अंडरवियर और फटी बनियान में रखा गया, मुंह पर लिपस्टिक पोती गई, चप्पलों की माला पहनाई गई और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।

हाईकोर्ट ने इस ‘इंस्टेंट जस्टिस’ वाली कार्रवाई को पूरी तरह गलत ठहराया। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने तल्ख टिप्पणी की कि अपराधी को सजा कानून देता है, न कि भीड़ या पुलिस का कोई मनमाना तरीका। चाहे अपराध कितना भी बड़ा क्यों न हो, आरोपी के साथ अमानवीय व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कानून सबके लिए बराबर है।कोर्ट ने सवाल उठाया कि कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और आरोपी को इस तरह अपमानित करने की इजाजत किसने दी? इसलिए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सीधा स्पष्टीकरण मांगते हुए महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) को तलब किया है।

अब महाधिवक्ता को खुद कोर्ट में आकर बताना होगा कि, पुलिस की यह कार्रवाई किस आदेश और नियम के तहत की गई? तमनार कांड में अब तक क्या एक्शन लिया गया? दोषी पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई हुई? भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठा रही है?

चीफ जस्टिस की ये तल्ख टिप्पणियां साफ संकेत दे रही हैं कि अब लापरवाही, दिखावटी कार्रवाई या मानवाधिकारों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा खासकर महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील मामलों में पुलिस और सरकार की जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है।

पूर्व महाधिवक्ता सतीश वर्मा ने इसे संदेश देने वाला कदम बताया है। उनका मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयों पर रोक लगाई जानी चाहिए। यह मामला सिर्फ तमनार या अभनपुर का नहीं रहा, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी बन गया है।

महिला पुलिसकर्मी के साथ हुई घटना बेहद शर्मनाक थी और इसकी जितनी निंदा की जाए वो कम है, लेकिन आरोपियों के साथ किए जा रहे सलूक भी सवाल के घेरे में है। हाईकोर्ट का साफ तौर पर कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं। न्याय सिर्फ बड़े लोगों के लिए नहीं, बल्कि हर इंसान की इज्जत और सुरक्षा के लिए है। अब सभी की नजरें महाधिवक्ता की पेशी और हाईकोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं। द लेंस ने समय-समय पर तमनार की सभी अपडेट्स आप तक पहुंचाई हैं। जिन दर्शकों को अब तक इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है, वे हमारे यूट्यूब चैनल समेत सभी प्लेटफॉर्म्स पर देख सकते हैं।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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