Census of India 2027: दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना अब आधुनिक रूप ले रही है। जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 (बुधवार) से 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो रहा है। यह भारत की 16वीं जनगणना है जो 2011 के बाद 16 साल के लंबे अंतराल के बाद हो रही है। पहली बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी। नागरिकों को स्व-जनगणना (Self Enumeration) का विकल्प मिलेगा जिसमें वे खुद ऑनलाइन जानकारी भर सकेंगे। मोबाइल ऐप के जरिए गिनतीकर्ता डेटा संकलित करेंगे, जिससे प्रक्रिया तेज, सटीक और पारदर्शी बनेगी।
दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया
पहला चरण: हाउस लिस्टिंग और आवास जनगणना (अप्रैल से सितंबर 2026)
इस चरण में घरों की सूची बनाई जाएगी। घर की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं (पानी, बिजली, शौचालय, रसोई का ईंधन आदि), संपत्तियां और अन्य बुनियादी जानकारी जुटाई जाएगी। कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। कुछ राज्यों में 1 से 15 अप्रैल तक स्व-जनगणना का पोर्टल खुला रहेगा। यह चरण राज्य की सुविधा के अनुसार 30 दिनों में पूरा किया जाएगा।
दूसरा चरण: जनसंख्या गणना (फरवरी 2027)
इसमें हर व्यक्ति की विस्तृत जानकारी ली जाएगी, उम्र, लिंग, शिक्षा, व्यवसाय, प्रवासन, प्रजनन दर आदि। जाति जनगणना भी इसी चरण में इलेक्ट्रॉनिक रूप से की जाएगी। आजादी के बाद पहली बार पूर्ण जाति गणना हो रही है (SC/ST को छोड़कर 1931 के बाद यह पहला मौका है)। कुछ बर्फीले क्षेत्रों (लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड) में यह चरण सितंबर 2026 में ही पूरा हो जाएगा।
अधिकांश क्षेत्रों के लिए – 1 मार्च 2027 की आधी रात।
हिमालयी और बर्फीले क्षेत्रों के लिए – 1 अक्टूबर 2026।
क्यों है यह जनगणना खास?
पहली डिजिटल जनगणना: कागजी प्रक्रिया की जगह मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल।
स्व-जनगणना विकल्प: 16 भाषाओं में उपलब्ध, आम नागरिक आसानी से भाग ले सकेंगे।
जाति डेटा: सामाजिक न्याय, आरक्षण नीतियों और विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण।
लगभग 31 लाख गिनतीकर्ता और पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे।
कुल अनुमानित लागत: 11,718 करोड़ रुपये।
इस जनगणना से देश की वर्तमान जनसांख्यिकी, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रवासन की सटीक तस्वीर सामने आएगी। यह डेटा संसदीय क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण, विकास योजनाओं और नीति-निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।
पहले चरण में शुरू होने वाले क्षेत्र: अंडमान और निकोबार, दिल्ली (NDMC और छावनी बोर्ड), गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम आदि। अन्य राज्यों में भी अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चरणबद्ध तरीके से काम शुरू होगा। जनगणना का डेटा केवल समग्र आंकड़ों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा और किसी व्यक्तिगत या कानूनी उद्देश्य के लिए नहीं।











