कभी कथित तौर पर “जंगलराज” से नवाजे जा चुके बिहार की बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति ने सचमुच चिंता में डाल दिया है, जहां हाल ही में दो एएसआई की हत्या कर दी गई। इनमें से एक घटना मुंगेर की है, जहां दो गुटों का झगड़ा निपटाने गए एक एएसआई पर भीड़ ने जानलेवा हमला कर दिया। दूसरी घटना अररिया की है, जहां एक अपराधी को पकड़ने गए एक एएसआई की ग्रामीणों ने हत्या कर दी। यही नहीं, दरभंगा, मधुबनी और नवादा में भी पुलिस दलों पर हमले की खबरें हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां अपराधियों के हौसले कितने बुलंद है। लगभग दो दशक से बिहार की कमान नीतीश कुमार के हाथों में है, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों की ये घटनाएं बता रही हैं कि “सुशासन बाबू” की पकड़ कितनी ढीली पड़ चुकी है। हालत यह हो गई है कि राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर राजद की ओर से जब विधानसभा में प्रभावी कार्रवाई को लेकर बयान दिया गया तो सत्तारूढ़ एनडीए के कई सदस्यों ने उसका समर्थन किया। मुश्किल यह है कि बड़े अपराधियों से निपटने के लिए मुठभेड़ को कारगर तरीका मान लिया गया है, जैसा कि एक सत्तारूढ़ विधायक ने विधानसभा में गोली का जवाब गोली से देने की वकालत की! बिहार के मौजूदा हालात संस्थागत पतन को दिखा रहे हैं, लेकिन किसी भी लोकतंत्र में ऐसी चुनौतियों का जवाब “पुलिस स्टेट” बनकर नहीं दिया जा सकता।
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