अनूपपुर। जिले के भालूमाड़ा थाना इलाके के अंतर्गत बदरा में हुई एक बड़ी चोरी ने अब जिला पुलिस प्रशासन की साख को दांव पर लगा दिया है। पीड़ित संग्राम सिंह ने पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया है कि जिन हाथों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही अपराधियों से हाथ मिला लिया है। 50 लाख से अधिक की इस सेंधमारी में अब ‘इंसाफ’ की जगह ‘सौदेबाजी’ की बू आ रही है।
सूने मकान पर ‘नजर’, जीवन भर की पूंजी साफ
यह पूरा घटनाक्रम किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है। पीड़ित संग्राम सिंह 18 जनवरी 2026 को अपनी पत्नी के गंभीर इलाज के लिए नागपुर गए हुए थे। घर सूना पाकर चोरों ने इत्मीनान से इस वारदात को अंजाम दिया। चोरों ने अलमारियों के ताले तोड़कर 50 लाख रुपये मूल्य के सोने के जेवरात, 8.50 लाख की चांदी और लगभग 3 लाख रुपये नगद पर हाथ साफ कर दिया था। चोरों ने न केवल कीमती धातु चुराई, बल्कि जमीन के पुश्तैनी कागजात और महत्वपूर्ण फाइलें भी ले उड़े, जो किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करते हैं।
जांच की आड़ में ‘लेनदेन’ का खेल?
संग्राम सिंह का सीधा आरोप जांच अधिकारी जे.पी. लकड़ा और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर है। पीड़ित का दावा है कि पुलिस ने जांच के दौरान अनूपपुर और अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) के कुछ बड़े ज्वेलर्स को हिरासत में लिया था।पूछताछ में कई राज खुले थे, लेकिन जैसे ही बड़े नामों की संलिप्तता सामने आई, पुलिस ने फाइल को कमजोर करना शुरू कर दिया। एक आरोपी को खानापूर्ति के लिए जेल भेजकर बाकी मुख्य मोहरों को बचाने का खेल खेला गया।
ऑडियो रिकॉर्डिंग में कैद है ‘रिश्वत’ की मांग?
पीड़ित संग्राम सिंह ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि विवेचना अधिकारी एवं जांच अधिकारी ने कथित तौर पर आरोपियों को क्लीन चिट देने या मामला हल्का करने के बदले 4 से 5 लाख रुपये की मांग की। वही थाने के मुंशी पर भी 1 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है। उनके पास इन अधिकारियों से हुई बातचीत के पुख्ता ऑडियो साक्ष्य हैं, जो साबित करते हैं कि अपराधियों को पकड़ने के बजाय पुलिस पीड़ित का ही मानसिक और आर्थिक शोषण कर रही है।
आमजन का टूटता भरोसा
इस मामले ने पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक के उन दावों पर पानी फेर दिया है, जिनमें वे ‘अपराध मुक्त जिले’ की बात करते हैं। सवाल उठता है कि अगर जांच अधिकारी पर ही अपराधियों से सांठगांठ के आरोप हैं, तो निष्पक्ष जांच कैसे संभव है?
चोरी गए जेवरात की बरामदगी में देरी क्यों हो रही है?
संग्राम सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि वे हार मानने वाले नहीं हैं। उन्होंने उच्चाधिकारियों को भेजे पत्र में चेतावनी दी है कि यदि उनके साथ न्याय नहीं हुआ और उनकी जीवन भर की गाढ़ी कमाई बरामद नहीं की गई, तो वे गृह मंत्री और मुख्यमंत्री की चौखट तक जाएंगे।









