नई दिल्ली। ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की रिपोर्ट (The Guardian report) में बताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदेश यात्राओं के दौरान मिलने वाले कई सम्मान ऐसे हालात में दिए गए हैं जिनसे राजनीतिक आलोचना तेज हुई है। विपक्षियों ने कहा है, ‘पुरस्कार की घोषणा कीजिए और मोदी दौड़े चले आएंगे।’

रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में सेशेल्स ने मोदी को गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन नामक उच्च श्रेणी का सम्मान प्रदान किया। इस पुरस्कार की घोषणा मोदी के आगमन से कुछ ही दिन पहले हुई थी और वह इसका पहला प्राप्तकर्ता भी बने। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि प्रमाणपत्र पर देश नाम और शब्दों की वर्तनी में त्रुटियां थीं, जिससे आलोचना और बढ़ी।
द गार्डियन ने लिखा है कि आलोचक मानते हैं कि ऐसे पुरस्कारों का उद्देश्य यह संदेश देना है कि प्रधानमंत्री को उनकी ‘महानता’ के कारण विश्व भर में सम्मानित किया जा रहा है और भारत की बढ़ती वैश्विक हैसियत उनके व्यक्तित्व की देन है। विश्लेषकों के अनुसार, धड़ाधड़ मिलने वाले ऐसे सम्मान व्यक्तित्व केंद्रित राजनीति को मजबूत करते हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बीते एक साल में मोदी पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष बने जिन्हें इथियोपिया का ग्रेट ऑनर निशान और त्रिनिदाद और टोबैगो का ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक दिया गया। आलोचक इसे भारत की कूटनीति की उपलब्धि के बजाय मोदी की अंतरराष्ट्रीय छवि को चमकाने वाला संकेत मानते हैं।
वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रिपोर्ट में उठाए गए सवालों को खारिज करते हुए कहा है कि ये सम्मान प्रधानमंत्री की वैश्विक प्रतिष्ठा और भारत की बढ़ती भूमिका की मान्यता हैं। भाजपा नेता बताते हैं कि विश्व मंच पर भारत की आवाज मजबूत हो रही है और इसका श्रेय मोदी के नेतृत्व को जाता है।
द गार्डियन की रिपोर्ट के प्रकाश में यह बहस जारी है कि क्या ये पुरस्कार वास्तव में भारत की कूटनीतिक सफलता का प्रतीक हैं या फिर व्यक्तित्व-केंद्रित राजनीतिक संदेश का हिस्सा।










