महाराष्ट्र के अजातशत्रु थे अजीत पवार!

January 28, 2026 10:23 PM
Ajit Pawar plane crash

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की हवाई हादसे में हुई मौत ने देश में हवाई सेवा की सुरक्षा को लेकर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुधवार सुबह मुंबई से उन्होंने एक चार्टर प्लेन से अपने गृहक्षेत्र बारामती के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन लैंडिंग के वक्त उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में पवार के दो सहयोगियों सहित विमान के चालक दल के दोनों सदस्यों की मौत हो गई।

यह हादसा ऐसे समय हुआ है, जब पिछले साल 12 जून को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया के विमान के हादसे से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट में हैं। अहमदाबाद विमान हादसे में मारे गए लोगों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता विजय रुपाणी भी शामिल थे।

ताजा हादसे के संदर्भ में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने कहा है कि विमान के पायलटों को लैंडिंग की कोशिश करते समय रनवे ढूंढने में परेशानी हो रही थी। यह भी बताया जा रहा है कि यह हादसा खराब मौसम के कारण हुआ। यह भी पता चला है कि यह लियरजेट-45 (LJ45) का मध्यम आकार का विमान था और पिछले 16 साल से सेवा में था।

जाहिर है, इस हादसे के असली कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चलेगा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो इस हादसे की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने भी उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

जाहिर है, इस हादसे को लेकर आशंकाएं भी जताई जा रही हैं, जिनके बारे में अभी कुछ कहना ठीक नहीं होगा। लेकिन यह तय है कि अजीत पवार के निधन से महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति में भूचाल आ गया है।

दरअसल अजीत पवार महाराष्ट्र के आगामी जिला परिषद और पंचायत चुनाव के सिलसिले में बारामती में सभाओं को संबोधित करने के लिए वहां जा रहे थे।

ज्यादा दिन नहीं हुए जब उन्होंने भाजपा और शिवसेना (शिंदे) पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे और यह आशंकाएं जताई जा रही थीं कि वह महायुति का साथ छोड़कर चाचा शरद पवार से हाथ मिला सकते हैं।

दरअसल अजीत पवार की ऐसी उलटबासियां नई नहीं थी। कहा जाता है कि सियासत में कोई किसी का न तो स्थायी शत्रु होता है और न ही कोई स्थायी मित्र। लेकिन लगता है कि अजीत पवार का कोई शत्रु नहीं था। वह महाराष्ट्र की समकालीन राजनीति के अजातशत्रु थे।

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना करने के बावजूद वह हमेशा सत्ता के करीब रहे, इतने कि जब मर्जी हुई पाला बदल लिया। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीते डेढ़ दशक के दौरान वह महाराष्ट्र के छह सरकारों में उपमुख्यमंत्री रहे, जिनमें भाजपा, कांग्रेस और शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकारें शामिल थीं।

अपने चाचा शरद पवार की छाया में सियासत शुरू करने वाले अजीत पवार ने मौका पड़ने पर उनकी बनाई पार्टी एनसीपी को दो फाड़ करने से भी गुरेज नहीं किया था।

बीते नगरपालिका चुनावों में कई जगहों पर एनसीपी के दोनों धड़ों ने मिलकर चुनाव लड़ा था। इसे देवेंद्र फड़नवीस की अगुआई वाली महाराष्ट्र की महायुति सरकार के लिए संदेश माना गया था। दरअसल इस मामले में अजीत पवार अपने चाचा शरद पवार जैसे थे, और सियासी संकेतों के जरिये हलचल पैदा कर देते थे।

असल में अजीत पवार के जाने के बाद एनसीपी के साथ ही महायुति सरकार के भविष्य को लेकर चर्चाएं हो रही हैं, तो इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि एनसीपी में विभाजन के बाद अजीत पवार अपने गुट के एकमात्र बड़े नेता थे और उनके जाने से पार्टी में शून्य पैदा हो गया है। ऐसे में उनकी पार्टी के 41 विधायकों के अगले कदम पर भी नजर रहेगी। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या राज्यसभा सदस्य उनकी पत्नी सुनेत्रा उनकी पार्टी को एकजुट रख पाएंगी?

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