केंद्र सरकार के नए नियम पर एयरलाइंस कंपनियों का विरोध, 60% सीटें फ्री सिलेक्शन पर किराया बढ़ने की चेतावनी

March 21, 2026 1:05 PM

Air Fare Hike: यात्रियों को बड़ी राहत देने के मकसद से केंद्र सरकार ने हाल ही में बड़ा फैसला लिया था लेकिन अब प्रमुख एयरलाइंस कंपनियां इस पर कड़ा विरोध जता रही हैं। इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी बड़ी कंपनियों का कहना है कि हर फ्लाइट में कम से कम 60% सीटों को बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के उपलब्ध कराने के निर्देश से उनकी कमाई पर बुरा असर पड़ेगा। इससे उन्हें टिकट के बेस किराए में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है जिसका बोझ सभी यात्रियों पर पड़ेगा।

क्या है सरकार के नए नियम ?

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 18 मार्च को डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को निर्देश दिया कि घरेलू उड़ानों में हर फ्लाइट की कम से कम 60% सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के यात्रियों को चुनने के लिए उपलब्ध हों। इसका मुख्य उद्देश्य था, परिवार या दोस्तों के ग्रुप (एक ही PNR पर यात्रा करने वाले) को आसानी से साथ या पास-पास बैठने की सुविधा मिले।

वेब चेक-इन के दौरान ‘प्रेफर्ड सीट’ या अच्छी लोकेशन वाली सीटों के नाम पर भारी चार्ज वसूलने की शिकायतों को कम किया जाए। अभी तक ज्यादातर फ्लाइट्स में सिर्फ 20% सीटें ही फ्री सिलेक्शन के लिए मिलती थीं, बाकी पर 200 से 3000 रुपये तक एक्स्ट्रा चार्ज लगता था। नए नियम से यात्रियों को पसंद की विंडो, आइल या आगे वाली सीट चुनने में आसानी होगी, बिना अतिरिक्त पैसे दिए।

एयरलाइंस के विरोध की वजह क्या है ?

फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा को पत्र लिखकर इस निर्देश को तुरंत वापस लेने की मांग की है। FIA इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करती है। एयरलाइंस का तर्क है कि सीट सिलेक्शन चार्ज उनकी कुल कमाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे हटाने से राजस्व में भारी कमी आएगी। भारत में ईंधन, एयरपोर्ट चार्ज, रखरखाव और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं।

एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) के नियमों से एयरपोर्ट फीस हर साल बढ़ती है। कंपनियां पहले से ही बहुत कम मुनाफे पर चल रही हैं। Ancillary Revenue (अतिरिक्त सेवाओं से कमाई) ही उन्हें टिकाए रखती है। अगर यह चार्ज बंद हुआ तो नुकसान की भरपाई के लिए बेस फेयर बढ़ाना पड़ेगा। इससे वे यात्री भी प्रभावित होंगे जो सीट चुनना नहीं चाहते।

सरकार ने यह फैसला बिना एयरलाइंस या संबंधित पक्षों से चर्चा किए लिया, जो नियामकीय अतिक्रमण (regulatory overreach) है। इससे बाजार-आधारित मूल्य तय करने की आजादी प्रभावित होगी। FIA ने चेतावनी दी है कि यह कदम आगे चलकर और सख्त नियमों का रास्ता खोल सकता है जिससे पूरे एविएशन सेक्टर पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

यात्रियों पर क्या असर होगा ?

एक तरफ सरकार यात्रियों की शिकायतों को दूर करना चाहती है खासकर परिवारों और ग्रुप ट्रैवल करने वालों की। लेकिन एयरलाइंस की चेतावनी से सवाल उठ रहा है कि क्या फ्री सीट सिलेक्शन की जगह कुल टिकट महंगा हो जाएगा? अभी तक मंत्रालय ने एयरलाइंस के इस विरोध पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है। मामला चर्चा में है और आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद अहम फैसला हो सकता है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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