नई दिल्ली। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के डिसेंट नोट के बाद मौजूदा सीबीआई (CBI) निदेशक प्रवीण सूद को एक साल का एक्सटेंशन दे दिया गया है, जिससे वे अपना मूल कार्यकाल 24 मई 2026 को समाप्त होने वाला पूरा करने के बाद भी पद पर बने रह सकेंगे। कैबिनेट की अपॉइंटमेंट्स कमिटी (ACC) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई उच्च-स्तरीय चयन समिति की बैठक के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
इस एक्सटेंशन के साथ प्रवीण सूद CBI डायरेक्टर के रूप में एक अतिरिक्त वर्ष तक देश की शीर्ष जांच एजेंसी का नेतृत्व जारी रखेंगे। वे 25 मई 2023 से अपना कार्यकाल शुरू कर चुके हैं। कर्नाटक कैडर के 1986 बैच के IPS अधिकारी प्रवीण सूद को शुरू में दो साल के फिक्स्ड टर्म के लिए नियुक्त किया गया था। अब यह फैसला उन्हें मूल निर्धारित अवधि से आगे भी पद पर बनाए रखेगा।
इस सेवा विस्तार को ACC ने वैधानिक सलेक्शन कमेटी की सिफारिश पर मंजूरी दी। बैठक प्रधानमंत्री के आवास पर हुई थी, जिसमें CBI में नेतृत्व की निरंतरता के विकल्पों पर विचार किया गया।राजनीतिक विवाद: इस प्रक्रिया में राजनीतिक असहमति भी देखने को मिली।
इसके पहले विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चयन चर्चा के दौरान डिसेंट नोट दिया। उन्होंने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी भूमिका को केवल ‘रबर स्टैंप’ तक सीमित कर दिया गया। राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से भी अपना विरोध जताया और कहा कि वे ‘पूर्वाग्रही प्रक्रिया में भाग लेकर संवैधानिक कर्तव्य से मुंह नहीं मोड़ सकते।’
अपने डिसेंट नोट में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने उन्हें शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों की महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराई और पूरी प्रक्रिया को अनुचित बताया।प्l
CBI डायरेक्टर बनने से पहले प्रवीण सूद कर्नाटक में डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) के पद पर थे। 2023 में उनकी नियुक्ति भारत की प्रमुख जांच एजेंसी के प्रमुख के रूप में हुई, जो भ्रष्टाचार, वित्तीय अपराध और उच्च-प्रोफाइल आपराधिक मामलों की जांच करती है।
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