लेंस डेस्क। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी रहे ए.जी. पेरारिवलन (A.G. Perarivalan) अब मद्रास हाई कोर्ट में वकालत करेंगे। 27 अप्रैल को तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल में उनका औपचारिक नामांकन हुआ, जिसके बाद वे मद्रास उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस शुरू करेंगे।
नामांकन समारोह मद्रास हाई कोर्ट के ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। इसमें मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी ने ‘प्रोफेशनल एथिक्स एंड एटिकेट’ पर विशेष संबोधन दिया।
बार काउंसिल के अध्यक्ष पी.एस. अमलराज ने स्वागत किया, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष एस. प्रभाकरन ने नए नामांकितों का अभिनंदन किया। अधिवक्ता सी.के. चंद्रशेखर ने नामांकन प्रस्ताव पेश किया और नामांकन समिति के अध्यक्ष के. बालू ने शपथ दिलाई।
2022 में सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 142 के तहत विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पेरारिवलन को रिहा किया था, जिसके बाद उन्होंने कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की और 2025 में ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन पास किया। वे अब मुख्य रूप से कैदियों को कानूनी सहायता और आपराधिक न्याय सुधारों पर फोकस करते हुए प्रैक्टिस करेंगे।
तमिलनाडु बार काउंसिल के नामांकन समिति अध्यक्ष के. बालू ने स्पष्ट किया कि एडवोकेट्स एक्ट की धारा 24A के तहत दो साल की कूलिंग-ऑफ पीरियड पूरी होने के बाद पूर्व दोषी भी वकील के रूप में नामांकन करा सकते हैं। पेरारिवलन की रिहाई 2022 में हुई थी, इसलिए कानूनी रूप से कोई बाधा नहीं थी।
ए.जी. पेरारिवलन के बारे में
ए.जी. पेरारिवलन का पूरा नाम पेरारिवलन (उर्फ अरिवु) है। वे तमिलनाडु के तिरुपत्तुर जिले के जोलारपेट्टई के रहने वाले हैं। 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उस समय उनकी उम्र मात्र 19 वर्ष थी।
वे इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में डिप्लोमा कर रहे थे और द्रविड़ कड़गम (डीके) के मुख्यालय में रहते थे। आरोप था कि उन्होंने एलटीई (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) के सदस्य को दो 9-वोल्ट बैटरी उपलब्ध कराईं, जिनका इस्तेमाल राजीव गांधी की हत्या में लगे बम में किया गया। टीएडीए कोर्ट ने 1998 में उन्हें मौत की सजा सुनाई, जिसे बाद में आजीवन कारावास में बदल दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में सजा को बरकरार रखा लेकिन 2022 में लंबी कैद और अन्य आधारों पर रिहाई का आदेश दिया। उन्होंने कुल 31 वर्ष से अधिक जेल में गुजारे।
जेल में रहते हुए भी पेरारिवलन शिक्षा पर जोर देते रहे। रिहाई के बाद उन्होंने कानून की डिग्री हासिल की और अब कानूनी पेशे में कदम रखा है। उनकी मां अर्पुथम अम्माल लंबे समय से उनके मामले में न्याय की लड़ाई लड़ती रहीं।
प्रतिक्रिया में क्या कहा गया
कांग्रेस सांसद आर. सुधा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर पेरारिवलन के नामांकन को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने इसे न्यायिक इतिहास का ‘काला दिन’ बताया और गंभीर अपराधों (खासकर आतंकवाद से जुड़े) में दोषी ठहराए गए व्यक्तियों के वकालत पेशे में प्रवेश पर कानूनी ढांचे की समीक्षा की मांग की। दूसरी ओर, बार काउंसिल ने कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए नामांकन को उचित ठहराया है।









