नई दिल्ली |इंडिया गठबंधन की रामलीला मैदान रैली (Ramlila Maidan)में गैरहाज़िरी यूथ कांग्रेस के करीब सौ से ज्यादा पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, यह संख्या बढ़ सकती है। यूथ कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के करीब 60, हिमाचल प्रदेश के करीब 13, हरियाणा के करीब 10 पदाधिकारियों को सस्पेंड किया है। बाकी राज्यों में भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। सूत्रों के मुताबिक निलंबन की संख्या 500 तक पहुंच सकती है। अहम बात यह है कि यूथ कांग्रेस के बाद कांग्रेस पार्टी ने भी रैली में पदाधिकारियों के प्रदर्शन की समीक्षा शुरू कर दी है।

दरअसल यूथ कांग्रेस ने सभी राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला पदाधिकारियों को अनिवार्य रूप से एक नवंबर की रैली और मार्च में शामिल होने के निर्देश दिए थे। पदाधिकारियों की हाज़िरी की डिजिटल निगरानी के लिए एकत्रित होने वाली जगह (मिंटो रोड) पर बारकोड स्कैनर लगाए गए थे। रैली में आए पदाधिकारियों और उनके साथ आए लोगों को यूथ कांग्रेस के आधिकारिक एप (With IYC) पर रजिस्ट्रेशन करने को कहा गया था।


तीन राज्यों के 100 से ज्यादा पदाधिकारी निलंबित
यूथ कांग्रेस ने रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित ‘वोट चोरी रैली’ में गैरहाजिर रहने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। समाचार चैलन NDTV के अनुसार, मध्य प्रदेश के 60, हिमाचल प्रदेश के 13 और हरियाणा के 10 पदाधिकारियों समेत 100 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई अनुशासन और राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
डिजिटल अटेंडेंस देना किया गया था अनिवार्य
इस बार यूथ कांग्रेस ने रैली में उपस्थिति दर्ज कराने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और स्कैनर की व्यवस्था की थी। रैली में शामिल होने वाले पदाधिकारियों को डिजिटल चेक-इन करना था। हालांकि कई पदाधिकारियों का कहना है कि कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक के इलाके में इंटरनेट की गति बेहद धीमी थी। इसके कारण वे डिजिटल रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा सके। इसी मुद्दे को लेकर रैली के बाद समीक्षा बैठक बुलाई गई, जिसमें उपस्थिति संबंधी आंकड़ों की जांच की गई।
क्या कहा IYC अध्यक्ष ने
यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि रैली बेहद सफल रही और देशभर से करीब 15 हजार कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कुछ पदाधिकारियों ने संगठनात्मक अनुशासन का पालन नहीं किया। जवाबदेही तय करना किसी भी संगठन के लिए जरूरी है, इसलिए समीक्षा के बाद कार्रवाई की गई।
रैली से पहले राहुल गांधी के मार्च में शामिल होने के लिए यूथ कांग्रेस ने मिंटो रोड पर करीब दस हज़ार की भीड़ जुटा ली थी। लेकिन एप पर मात्र तीन हज़ार लोगों (2831) ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इसकी समीक्षा में सामने आया कि ज्यादातर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एप पर रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया। इसके पीछे तकनीकी जागरूकता और दिलचस्पी की कमी थी। इसके अलावा मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक के इलाके में इंटरनेट की धीमी गति से भी असर पड़ा। रैली के बाद हुई समीक्षा और पड़ताल में यूथ कांग्रेस के नेतृत्व ने पाया कि भीड़ के बावजूद बड़ी संख्या में पदाधिकारी बिना कारण बताए ग़ायब थे। इसके बाद से ऐसे पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला जारी है।
भाजपा ने किया निलंबन पर पलटवार
कांग्रेस ने रैली से पहले बड़े पैमाने पर कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचने का निर्देश दिया था। पार्टी नेताओं ने बड़ी संख्या में लोगों के जुटने का दावा किया था। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने रैली में भीड़ को लेकर सवाल उठाए। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि कांग्रेस द्वारा किए गए दावों के मुकाबले अपेक्षित संख्या में लोग नहीं पहुंचे। इसके बाद रैली में अनुपस्थित रहने वाले पदाधिकारियों पर हुई कार्रवाई ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।











