तीन राज्यों में 40 हजार से ज्यादा कारतूस बरामद, तस्करी के आरोपियों की RSS की वर्दी में तस्वीरें सामने आईं

नई दिल्ली। बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में 40 हजार से ज्यादा कारतूसों की कथित तस्करी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों की RSS की वर्दी में तस्वीरें सामने आई हैं। बिहार में गिरफ्तार चंदन तिवारी और उसके भाई अभिषेक तिवारी की तस्वीरें समाचार वेबसाइट मुस्लिम मिरर ने प्रकाशित की हैं। एक अन्य तस्वीर में दोनों को मुजफ्फरपुर के एक स्थानीय विधायक के साथ दिखाए जाने का दावा किया गया है। इस खुलासे के बाद आरोपियों के राजनीतिक और संगठनात्मक संबंधों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन तस्वीरों से RSS की तस्करी में किसी भूमिका की पुष्टि नहीं होती।

हरियाणा में दो गाड़ियों से 25 हजार कारतूस बरामद

बिहार STF से मिली सूचना पर हरियाणा STF ने झज्जर जिले के रोहद टोल प्लाजा के पास कार्रवाई की। त्रिवेणी ढाबे के बाहर खड़ी टाटा हैरियर और हुंडई ऑरा की तलाशी में क्रमशः 24,400 और 600 जिंदा कारतूस मिले। पुलिस ने आठ मोबाइल फोन जब्त कर पांच लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें अफीफुद्दीन उर्फ मुन्ना खान, आसिम रईस, सबलू खान, अरबाज अली और जीनत शामिल हैं। सभी उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के रहने वाले हैं।

पुलिस के मुताबिक, मुन्ना खान बदायूं में गन हाउस चलाता है। आरोप है कि उसने हरियाणा के सिरसा स्थित महक गन हाउस के संचालक विजय गोयल से कारतूस खरीदे थे। बरामद कारतूसों के वैध दस्तावेज पेश नहीं किए जा सके। मामले में आर्म्स एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई है।

बिहार में गिरफ्तारी से खुला तस्करी का नेटवर्क

इससे पहले बिहार STF ने भोजपुर जिले में 19 हजार से ज्यादा कारतूस बरामद किए थे। इस मामले में चंदन तिवारी समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई। जांच में बदायूं के हथियार कारोबारियों से कथित संपर्क सामने आए। ललटू नाम के एक अन्य आरोपी के पास से भी बड़ी मात्रा में कारतूस मिलने की खबर है। अलग-अलग रिपोर्टों में कुल बरामदगी 40 से 45 हजार के बीच बताई गई है।

RSS की वर्दी में तस्वीरों से उठे सवाल

मुस्लिम मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, चंदन तिवारी का भाई अभिषेक तिवारी पहले से हथियार तस्करी के एक अलग मामले में जेल में बंद है। दोनों की RSS की वर्दी जैसी पोशाक में प्रकाशित तस्वीरों ने उनके संगठनात्मक संबंधों को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों RSS के सक्रिय सदस्य रहे हैं या नहीं। तस्वीरों के आधार पर किसी संगठन को इस अवैध कारोबार से जोड़ना फिलहाल संभव नहीं है।

सरकारी कारखानों से निकले कारतूस तस्करों तक कैसे पहुंचे?

इस मामले में सबसे गंभीर सवाल कारतूसों की सप्लाई को लेकर है। रिपोर्टों के मुताबिक, बरामद कारतूसों में कुछ सरकारी आयुध कारखानों में निर्मित होने की आशंका है। यदि इसकी पुष्टि होती है, तो सवाल उठेगा कि सरकारी निगरानी और लाइसेंसी हथियार दुकानों की व्यवस्था के बावजूद इतनी बड़ी खेप अवैध कारोबार तक कैसे पहुंची।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के भी जांच से जुड़ने की खबर है। जांच एजेंसियां कारतूसों के स्रोत, हथियार दुकानों की भूमिका और इनके अंतिम खरीदारों का पता लगाने में जुटी हैं। बिहार के एक पुराने हथियार तस्करी मामले से संभावित संबंध भी खंगाले जा रहे हैं। फिलहाल यह साफ नहीं है कि हजारों कारतूस किसके लिए मंगाए गए थे और इनका इस्तेमाल कहां होना था।

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