गोरखपुर। पूर्वांचल और बिहार के सीमावर्ती जिलों के मरीजों के लिए उम्मीद बने गोरखपुर AIIMS की व्यवस्था पर एक घटना ने सवाल खड़े कर दिए हैं। AIIMS गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता खुद बीमार पड़ गईं। उन्हें AIIMS में ही भर्ती कराया गया, लेकिन कैथ लैब की सुविधा न मिलने के कारण उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा। करीब आधे घंटे तक वे निजी अस्पताल में रहीं और फिर वापस लौट आईं।
इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जब अस्पताल की निदेशक को ही जरूरी स्वास्थ्य सुविधा के लिए निजी अस्पताल का रुख करना पड़ा, तो आम मरीजों की क्या स्थिति होगी।
7 साल बाद भी नहीं मिली कैथ लैब
गोरखपुर AIIMS को खुले सात साल हो चुके हैं, लेकिन यहां अभी तक कैथ लैब की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। कैथ लैब हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बहुत जरूरी मानी जाती है। इस सुविधा के अभाव में गंभीर मरीजों को अक्सर दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। पूर्वांचल और बिहार के कई जिलों से आने वाले मरीज AIIMS पर निर्भर रहते हैं, लेकिन जरूरी सुविधा न होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सवाल व्यवस्था पर
डॉ. विभा दत्ता की तबीयत खराब होने और उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ने की खबर फैलने के बाद AIIMS गोरखपुर की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि इतने साल बीत जाने के बाद भी इतनी महत्वपूर्ण सुविधा क्यों नहीं उपलब्ध कराई जा सकी। दिल की गंभीर समस्या होने पर तुरंत कैथ लैब की जरूरत पड़ती है। AIIMS गोरखपुर प्रशासन की तरफ से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।










