रायपुर। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ से धान की फसल को हुए नुकसान के बाद अखिल भारतीय किसान महासभा, छत्तीसगढ़ ने किसानों के लिए तत्काल राहत पैकेज घोषित करने की मांग की है। महासभा ने सरकार से प्रभावित किसानों को 45 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने, इस साल का पूरा कृषि कर्ज माफ करने और फसल बीमा का समुचित लाभ दिलाने की मांग की है।
महासभा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सरकारी नीतियों के कारण पहले से संकट का सामना कर रहे किसानों की मुश्किलें चक्रवाती तूफान ने और बढ़ा दी हैं। धान की फसल पककर कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन तूफान के कारण पानी से भरे खेतों में धान के पौधे जमीन पर गिर गए हैं। कई खेतों में धान की बालियां पानी में डूब गई हैं। इससे फसल के सड़ने और धान का दाना काला पड़ने की आशंका है।
महासभा ने चेतावनी दी है कि इस गंभीर स्थिति में सरकार ने तत्काल ठोस राहत नीति घोषित नहीं की तो किसानों का संकट और गहरा सकता है तथा किसान आत्महत्या की घटनाएं बढ़ने का खतरा है।
महासभा के संयोजक नरोत्तम शर्मा ने किसानों से धैर्य के साथ इस संकट का सामना करने और अपने हितों में राहत नीति लागू कराने के लिए संगठित होकर संघर्ष करने की अपील की है। उन्होंने कोरोना काल में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर चले 380 दिन के किसान आंदोलन को याद करते हुए किसानों से उससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
महासभा ने सरकार से क्षतिग्रस्त धान की फसल को बढ़े हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदने की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए मुआवजा, कर्ज माफी, फसल बीमा और समर्थन मूल्य पर खरीद जैसे कदम तत्काल उठाए जाने चाहिए।









