नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। 2004 की एमसी रोड विकास परियोजना से जुड़े एक ठेकेदार ने आरोप लगाया है कि ज्ञानेश कुमार ने राज्य के पीडब्ल्यूडी सचिव रहते हुए बिलों की मंजूरी में देरी की और इंडो-मलेशियाई संयुक्त उपक्रम पैटी-बेल के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर ली सी बीन से 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी। इससे ली ने आत्महत्या कर ली। सजन बी. ओ. नाम के ठेकेदार ने बुधवार को तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों को यह जानकारी दी। समाचारपत्र न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने इसकी रिपोर्ट प्रकाशित की है।
सजन ने कहा कि उनके पास मौजूद दस्तावेज और सबूत सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सौंप दिए जाएंगे। यह ब्यूरो विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट की सड़क नवीनीकरण ठेकेदारी में अनियमितताओं की जांच कर रहा है।
उन्होंने कहा, “अलाप्पुझा-चंगनाशेरी और चंगनाशेरी-मडुक्कामूडू हिस्सों को कवर करने वाली 124 किलोमीटर की सड़क विकास परियोजना 274 करोड़ रुपये में दी गई थी। हालांकि, परियोजना 2005 में रोक दी गई। इस परियोजना में कई ठेकेदार शामिल थे।
बताया गया कि अन्य अधिकारियों द्वारा मंजूर किए गए बिलों को ज्ञानेश कुमार ने रोक दिया और 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी। लेकिन मलेशियाई कंपनी यह राशि देने को तैयार नहीं थी।” उन्होंने आगे कहा कि ली ने उसी कंपनी द्वारा बेंगलुरु में चलाई जा रही एक परियोजना से पैसे निकालकर बकाया चुकाने की कोशिश की, लेकिन बाद में आत्महत्या कर ली, क्योंकि परियोजना और फंड की मंजूरी जानबूझकर रोकी जा रही थी और वे देनदारियां पूरी नहीं कर पा रहे थे। सजन ने कहा कि वे सतर्कता जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
पीडब्ल्यूडी सचिव के रूप में ज्ञानेश कुमार केएसटीपी की मुख्य सेंट्रल (एमसी) रोड के काम के प्रभारी थे। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कांग्रेस नेता मलायिंकिल वेणुगोपाल द्वारा दायर शिकायत के आधार पर सतर्कता जांच का आदेश दिया था।









