रायपुर। IDBI बैंक के निजीकरण के विरोध में बैंक के अधिकारी और कर्मचारी 2 और 3 नवंबर को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल करेंगे। सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की बैंक में संयुक्त 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने के प्रस्ताव के खिलाफ यह हड़ताल बुलाई गई है। ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIIEA) ने भी बैंक कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की है। संगठन के मुताबिक, देशभर के बीमा कर्मचारी 2 नवंबर को दोपहर के भोजन अवकाश के दौरान विरोध प्रदर्शन करेंगे।
विदेशी कंपनी को हिस्सेदारी बेचने पर उठाए सवाल
एआईआईईए के अध्यक्ष धर्मराज महापात्र और महासचिव श्रीकांत मिश्रा ने संयुक्त प्रेस बयान जारी कर सरकार के फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि बैंकिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में विदेशी कंपनी को बहुमत हिस्सेदारी देने से देश के वित्तीय संसाधनों और घरेलू बचत पर विदेशी पूंजी का नियंत्रण बढ़ सकता है। संगठन ने आईडीबीआई बैंक में एलआईसी के निवेश को लेकर भी चिंता जताई है।
पदाधिकारियों के मुताबिक, आईडीबीआई बैंक पिछले कुछ वर्षों से लगातार मुनाफा कमा रहा है और उसकी वित्तीय स्थिति में भी सुधार हुआ है। ऐसे में बैंक को निजी हाथों में सौंपने की जरूरत पर सवाल उठते हैं। उन्होंने वर्ष 2003 में संसद में दिए गए सरकार के उस आश्वासन का भी जिक्र किया, जिसमें आईडीबीआई में कम से कम 51 प्रतिशत सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने की बात कही गई थी।
विनिवेश लक्ष्य पूरा करने के लिए निजीकरण का आरोप
बीमा कर्मचारी संगठन का आरोप है कि सरकार चालू वित्तीय वर्ष के लिए तय 80 हजार करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के उद्देश्य से बैंक की हिस्सेदारी बेच रही है। संगठन ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों का निजीकरण लंबे समय में देश के आर्थिक हितों को प्रभावित कर सकता है।
एआईआईईए ने सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण की नीति का विरोध करते हुए कहा कि बैंकिंग और बीमा क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। संगठन ने स्पष्ट किया है कि बीमा कर्मचारी फिलहाल बैंक की दो दिवसीय हड़ताल के समर्थन में 2 नवंबर को प्रदर्शन करेंगे। यह घोषणा बीमा कर्मचारियों की अलग से दो दिन की हड़ताल की नहीं है।
हालांकि, सरकार या प्रस्तावित खरीदार की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया प्रेस बयान में नहीं दी गई है। बैंक की हिस्सेदारी बिक्री को लेकर सरकार का पक्ष और अंतिम सौदे की स्थिति अलग से स्पष्ट होना बाकी है।









