सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को आदेश,फॉर्म 7 की गड़बड़ी दूर करें, छत्तीसगढ़ और केरल के मामले में हलफनामा मांगा


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज भारत निर्वाचन आयोग को उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों के SIR के दौरान थोक में फॉर्म 7 जमा करने के आरोपों के संबंध में सुधारात्मक कदम उठाने को कहा। फॉर्म 7 किसी व्यक्ति द्वारा ड्राफ्ट रोल में शामिल मतदाता को हटाने की मांग करने के लिए दाखिल किया जाता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ उत्तर प्रदेश एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं में दायर एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया और समाजवादी पार्टी नेता अरविंद कुमार सिंह शामिल हैं।

सुनवाई के दौरान आवेदक के वकील ने कहा कि 5 अगस्त को ECI को 2 सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था। ECI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दमा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि काउंटर एफिडेविट दाखिल कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आरोपों की जांच पर फॉर्म फर्जी पाए गए और उन पर कार्रवाई नहीं की गई।

नायडू ने कहा, “इस पर ध्यान दिया गया है। हमें पता चला कि थोक में फॉर्म 7 दिए गए थे। हमारे अधिकारियों ने जाकर जांच और क्रॉस-चेक किया। वे फर्जी थे और हमने उन पर कार्रवाई नहीं की।”आवेदक के वकील ने न्यायिक जांच पर जोर दिया और ईसीआई के इस दावे को चुनौती दी कि कोई भी फर्जी फॉर्म 7 “प्राप्त” नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि एक निर्वाचन क्षेत्र में एक विशेष समुदाय के खिलाफ 32 फॉर्म 7 जमा किए गए, जिनमें से 2 पर बीएलओ के हस्ताक्षर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी एसआईआर के दौरान कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जाने के कारण अधिकारियों को साहस मिला और कर्नाटक तथा तेलंगाना में भी ऐसी ही स्थिति पैदा हुई जहां सीईओ ने थोक फॉर्म 7 दाखिल करने पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।

अंततः सीजेआई ने आवेदक के वकील से ईसीआई को लंबित मुद्दों का विवरण देने को कहा। इसे प्राप्त होने पर अदालत ने कहा कि ECI तथ्यात्मक पहलुओं की जांच करे, आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे।
अदालत ने आदेश दिया, “याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कहते हैं कि याचिकाकर्ता के ध्यान में कुछ और अनियमितताएं लाई गई हैं। वे ईसीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता को नोट के रूप में सौंपेंगे। इसे प्राप्त होने पर ईसीआई तथ्यात्मक पहलुओं की जांच करे, आवश्यक सुधार करे और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे।”

केरल और छत्तीसगढ़ में एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं के संबंध में नायडू ने कहा कि ECI प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और मामले अनिवार्य रूप से निरर्थक हो गए हैं। केरल SIR के बारे में एक वकील ने समय बढ़ाने की मांग की और कहा कि सत्यापन अवधि आज समाप्त हो जाएगा। शुरुआत में किसी ने नायडू से कहा कि अवधि कुछ दिनों के लिए बढ़ाई जा सकती है, क्योंकि कोई तात्कालिकता नहीं है। हालांकि नायडू ने जवाब दिया कि अगर कोई प्रतिनिधित्व होता तो ECI उस पर विचार कर सकता था, लेकिन कोई नहीं था। उन्होंने यह भी बताया कि SIR के बाद केरल में चुनाव हो चुके हैं।

वकील ने कहा, “24 लाख इस सत्यापन से बाहर हैं।” सीजेआई ने तब टिप्पणी की कि ईसीआई की ओर से प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन गलती से छूटे किसी भी व्यक्ति का समावेश जारी रह सकता है।सीजेआई ने कहा, “आप पता लगाएं कि ये ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें अभी भी मौका दिया जा सकता है, प्रतिनिधित्व के माध्यम से ECI ध्यान में लाएं। हम उन्हें जांच करने को कहेंगे।” नायडू ने बताया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी चुनाव हो चुके हैं।
आदेश में दर्ज किया गया:“केरल में SIR पूरा हो चुका है। हालांकि याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कहते हैं कि कई ऐसे व्यक्ति हैं जो समय की कमी के कारण गणना फॉर्म जमा नहीं कर सके। याचिकाकर्ता ऐसे व्यक्तियों का विवरण ईसीआई को दे, जो उस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे और इस अदालत को रिपोर्ट प्रस्तुत करे।”सीजेआई ने बाद में टिप्पणी की कि समय बढ़ाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि रोल में सुधार यह एक निरंतर प्रक्रिया है।।

छत्तीसगढ़ SIR पर यह बताया गया कि दिसंबर में नोटिस जारी होने के बावजूद ECI ने कोई काउंटर एफिडेविट दाखिल नहीं किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने तर्क दिया कि ईसीआई मामले को केवल इसलिए निरर्थक नहीं कह सकता क्योंकि प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा, “हम भी एक नोट जमा कर रहे हैं, बड़े पैमाने पर विलोपन हुए हैं। उन्हें व्यापक एफिडेविट दाखिल करने दें।”अदालत ने ECI को काउंटर एफिडेविट तथा याचिकाकर्ता के नोट का जवाब दाखिल करने के लिए 4 सप्ताह का समय दिया।

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