नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का शुक्रवार को प्रस्तावित ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम बारिश के कारण एक दिन के लिए टाल दिया गया है। अब यह कार्यक्रम शनिवार, 31 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर होगा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बारिश में वरिष्ठ नेताओं को बैठने में परेशानी हो सकती थी, इसलिए सभी दलों ने मिलकर कार्यक्रम की तारीख बदलने का फैसला लिया है।
एक नवंबर को रामलीला मैदान तक मार्च करेगा विपक्ष
राहुल गांधी ने बताया कि रविवार, एक नवंबर को INDIA गठबंधन दिल्ली के रामलीला मैदान तक मार्च करेगा। इसमें विपक्षी दलों के साथ सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और आम लोगों को भी शामिल होने का न्योता दिया गया है। राहुल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाले लोगों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना और पंजाब का जिक्र करते हुए कहा कि इन राज्यों से आने वाले कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को परेशान किया जा रहा है। इन आरोपों पर गृह मंत्रालय की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल
विपक्ष का यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर आयोजित किया जा रहा है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों के कारण लाखों लोगों का मतदान अधिकार प्रभावित हो रहा है। हालांकि, इन आरोपों को चुनाव आयोग ने स्वीकार नहीं किया है।
गुरुवार को कार्यक्रम की तैयारियों के लिए विपक्षी नेताओं की बैठक भी हुई थी। इसमें प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, मीरा कुमार, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन, समाजवादी पार्टी के हरेंद्र मलिक, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी और माकपा के जॉन ब्रिटास समेत कई नेता शामिल हुए। शुक्रवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि सभी विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट हैं।
‘जन महाभियोग’ विपक्ष की ओर से आयोजित प्रतीकात्मक विरोध है। इसका संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है।









