सुप्रीम कोर्ट ने ‘ब्रेस्ट टैक्स’ पर फेसबुक पोस्ट को लेकर हेट स्पीच FIR पर छत्तीसगढ़ पुलिस पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने सोमवार को एक सामाजिक कार्यकर्ता के खिलाफ ‘ब्रेस्ट टैक्स’ पर फेसबुक पोस्ट को लेकर दर्ज FIR पर सवाल उठाए। पोस्ट में हिंदू महिलाओं के बारे में कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ रूपनारायण एक्का की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत देने से इनकार करने के फैसले को चुनौती दी थी।

न्यायालय ने कहा, “FIR दर्ज करने की जरूरत क्या है? बड़े मामलों पर ध्यान दें। इस तरह के मामलों पर नहीं।”

एक्का की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि फेसबुक पोस्ट से कोई अपराध नहीं बनता। “यह एक फेसबुक पोस्ट है, जिसमें बस इतना कहा गया है कि हिंदुओं को सिखाओ कि महिलाओं के स्तन ढकने पर लगने वाला कर औरंगजेब ने नहीं, बल्कि किसी ब्राह्मण ने लगाया था। बस इतना ही। यह कोई अपराध नहीं है,” उन्होंने कहा।

“इसका मतलब है कि लोगों के पास समय बर्बाद करने के लिए बहुत वक्त है,” जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की।

राज्य के वकील ने कहा कि कोर्ट ने 9 सितंबर को नोटिस जारी किया था, लेकिन तब से एक्का पुलिस स्टेशन नहीं पहुंचे। “आप उन्हें समन भेजिए। वे उपस्थित होंगे,” पीठ ने कहा। राज्य के वकील ने बताया कि एक्का की उपस्थिति की मांग वाला नोटिस आज ही जारी किया जा रहा है।

इस बीच, भूषण ने राज्य द्वारा अग्रिम जमानत याचिका पर जवाब दाखिल न करने पर सवाल उठाया। राज्य के वकील के अनुरोध पर पीठ ने मामले को 4 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दिया।

मामला छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुनकुरी पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से जुड़ा है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 (धार्मिक विश्वासों का जानबूझकर अपमान करके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) और 353(2) (समुदायों के बीच नफरत फैलाने के इरादे से झूठी जानकारी या अफवाह फैलाना) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक्का ने 13 अप्रैल, 2025 को सोशल मीडिया पर हिंदू महिलाओं के बारे में अपमानजनक सामग्री पोस्ट की थी। इसके बाद ब्राह्मण सोसाइटी के चेयरमैन दीपक मिश्रा ने शिकायत दर्ज कराई।

एक्का ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत मांगी, लेकिन उनकी अर्जी 15 दिसंबर, 2025 को गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने दूसरी अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की, जिसमें उन्होंने पहले आदेश की उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई कि उन्होंने दूसरे मामले में जमानत मिलने के बाद कथित अपराध किया था।

हाईकोर्ट ने 3 जुलाई को दूसरी अर्जी भी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि हालात में कोई बड़ा बदलाव नहीं है और उसने एक्का के अन्य समान मामलों में कथित रूप से शामिल होने का भी हवाला दिया। इसके बाद एक्का सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

सितंबर में शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका पर नोटिस जारी किया था और जांच में सहयोग करने की शर्त पर उनके खिलाफ कोई जबरदस्ती कदम न उठाने का निर्देश दिया था।

आज की सुनवाई में पीठ ने मामला 4 दिसंबर तक स्थगित कर दिया और अगली सुनवाई तक अंतरिम संरक्षण आदेश बढ़ा दिया।

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