नई दिल्ली। अभिनेता टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff)की कार पर 18 अक्टूबर को शाम 7 बजे के आसपास जुहू में गोलीबारी कर मोटरसाइकिल पर फरार हुए हमलावरों की धर-पकड़ के लिए मुंबई पुलिस एक्टिव हो गई थी, लेकिन इस धरपकड़ के खेल में हमलावर फरार होने में सफल रहे। इसकी वजह यह थी कि हमलावरों को लगातार जानकारी मिल रही थी कि टीवी न्यूज चैनलों पर प्रसारित खबरों के आधार पर पुलिस की जांच कहां तक पहुंची है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जब आरोपियों की तस्वीरें टेलीविजन पर प्रसारित होने लगीं, तो उनमें से एक को मैसेज मिला। इसमें कहा गया था, ‘तुम्हारे चेहरे आ गए हैं, निकल जाओ वहां से।’
संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध शाखा) अनिल कुंभारे ने इस संबंध में टिप्पणी मांगने के लिए भेजे गए संदेश का कोई जवाब नहीं दिया।
हमले में टाइगर श्रॉफ बाल-बाल बच गए, जबकि उनके ड्राइवर और एक व्लॉगर घायल हो गए। तीन हमलावरों फूल सिंह (18), रेहान रहीसुद्दीन अंसारी (18) और ऋतिक महतो (22) को अगले दिन राजस्थान में गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें 31 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। पुलिस ने अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें एक किरदार अनिल पंडित का भी नाम सामने आया है, जिसने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा होने का दावा किया है। उसने एक अनवेरिफाइड सोशल मीडिया पोस्ट में इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
सूत्रों ने कहा कि पुलिस अभी यह पता नहीं लगा पाई है कि शूटरों को टीवी न्यूज अपडेट कौन भेज रहा था, लेकिन जांचकर्ताओं को शक है कि संदिग्धों में से एक रेहान अंसारी को कम्युनिकेशन ऐप के जरिए गाइड करने वाले या तो बिश्नोई गैंग के गुर्गा अनिल पंडित था, जिसके बारे में माना जाता है कि वह US में छिपा है, या अंकित खटक और समीर खत्री हैं, जिन्हें हाल ही में सोनीपत में गिरफ्तार किया गया था। ये दोनों कथित तौर पर शूटरों और पंडित के बीच एक लिंक का काम कर रहे थे।
हालांकि पुलिस सूत्रों ने यह नहीं बताया कि किस मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन माना जाता है कि बिश्नोई गैंग ‘सिग्नल’ या ‘जंगी’ का इस्तेमाल करता है। जंगी आर्मेनिया में बना एक ऐप है जिसमें रजिस्टर करने के लिए मोबाइल नंबर की जरूरत नहीं होती।
सीसीटीवी फुटेज में रेहान लगातार फोन पर बात करता हुआ दिखा है। सूत्र ने कहा, “हमें पता था कि यह कोई ऐसा ऐप है जो ‘वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल’ (VoIP) का इस्तेमाल करता है, लेकिन हम इसका पता नहीं लगा पाए।” अब जब आरोपी पुलिस की हिरासत में हैं, तो पुलिस को दोनों पक्षों के बीच हुई कुछ बातचीत का पता चल गया है।
सूत्र ने कहा, “कुछ वीडियो और तस्वीरों के अलावा, हमें पता चला है कि कोई व्यक्ति उन्हें यह जानकारी दे रहा था कि पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए जांच में कहां तक पहुंची है। हमें संदेह है कि दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति न्यूज चैनलों पर नजर रख रहा था और जैसे ही कोई जानकारी प्रसारित होती थी, वह रेहान को सतर्क कर देता था।”
एक वक्त ऐसा भी आया, जब न्यूज चैनलों ने पार्क के बाहर पपराजी और व्लॉगर्स द्वारा बनाए गए वीडियो के जरिए उनके चेहरों पर ध्यान केंद्रित किया। तब रेहान को एक संदेश भेजकर इस बारे में आगाह किया गया।
सूत्र ने बताया कि दूसरे संदेश भी इसी तरह के थे। उनके मददगार उन्हें जांच की स्थिति के बारे में लगातार जानकारी देते रहते थे। उदाहरण के लिए, उन्हें कथित तौर पर बताया गया कि पुलिस ने अंधेरी में उनकी बाइक का पता लगा लिया है और उसे यह भी मालूम है कि वे ट्रेन से यात्रा कर चुके हैं।
सूत्र ने कहा, “यही एक वजह हो सकती है कि उन्होंने बार-बार यात्रा के साधन बदले। वे बाइक से ट्रेन, फिर कैब से गए और बाद में सूरत बस स्टैंड से बस पकड़ने की योजना बनाई, लेकिन जब इसमें बहुत ज्यादा समय लगने लगा, तो उन्होंने दूसरी ट्रेन लेने का फैसला किया।” मुंबई पुलिस के अनुरोध पर कार्रवाई करते हुए कोटा पुलिस ने उसी ट्रेन में उन्हें पकड़ लिया।
द इंडियन एक्सप्रेस ने 20 अक्टूबर को सबसे पहले खबर दी थी कि फरार होने के दौरान आरोपियों ने मोबाइल नेटवर्क के बजाय केवल इंटरनेट के माध्यम से कॉल की थीं। ऐसी कॉल मोबाइल फोन के सामान्य कॉल रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होतीं, जिससे उनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों ने नियमित रूप से केवल एक फोन कॉल किया था उस कैब ड्राइवर को, जिसने उन्हें मुंबई के उत्तरी उपनगर बोरीवली से सूरत पहुंचाया था। इसी कॉल के आधार पर पुलिस आखिरकार सूरत पहुंची और वहां से रेलवे स्टेशन तक पहुंची, जहां से आरोपी ट्रेन में सवार होकर जयपुर गए थे।








