सरकार सुप्रीम कोर्ट पर कब्जा करने की कोशिश कर रही, बोले कपिल सिब्बल

नई दिल्ली। अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 2014 से सरकार लगातार संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है।

कपिल सिब्बल ने क्या कहा?

सिब्बल के अनुसार, सरकार ने सबसे पहले मीडिया को अपने प्रभाव में लिया, ताकि आम लोगों की समस्याओं और जमीनी हकीकत की खबरें जनता तक न पहुंच सकें। मीडिया के बाद विश्वविद्यालयों, राज्यपालों और अन्य संस्थाओं को भी प्रभावित करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा:“सबसे पहले उन्होंने मीडिया पर कब्जा किया। मीडिया पर कब्जा करने के बाद उन्होंने अन्य संस्थाओं पर कब्जा किया। एक संस्था अभी भी बची है, और वह है भारत का सुप्रीम कोर्ट। वे इसकी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि ऐसा नहीं हो सकता। फिर उन्होंने सोचा कि अगर कोई और कब्जा नहीं हुआ, तो मतदाता सूची पर कैसे कब्जा करें?”

सिब्बल ने आगे कहा कि जब दूसरी संस्थाओं पर सवाल उठने लगे, तो अब मतदाता सूची को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR (मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर उठे विवाद पर भी बात की।

प्रदर्शन के अधिकार पर बात

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और विरोध-प्रदर्शनों पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर भी सिब्बल ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संविधान के तहत लोगों का मौलिक अधिकार है। इस अधिकार पर रोक तभी लगाई जा सकती है, जब उसके लिए संविधान के तहत उचित आधार मौजूद हों, जैसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत।
उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंधों पर भी सवाल उठाए। सिब्बल ने कहा कि प्रशासन को यह बताना होगा कि इन पाबंदियों को लगाने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने साफ कहा कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाया जाएगा और उन्हें पूरा भरोसा है कि अदालत लोगों के विरोध-प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा करेगी।

सिब्बल का पूरा बयान

“2014 से   नीति संस्थाओं पर कब्जा करने की रही है। सबसे पहले उन्होंने मीडिया पर कब्जा किया। और उन्होंने विश्वविद्यालयों, राज्यपालों समेत ज्यादातर अन्य संस्थाओं पर कब्जा कर लिया। लेकिन एक चीज जिस पर वे कब्जा नहीं कर पाए, वह है भारत का सुप्रीम कोर्ट। और हमें पूरा यकीन है कि सुप्रीम कोर्ट अंततः इन सब बातों को ध्यान में रखेगा और लोगों के विरोध करने के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करेगा।” यह बयान लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया, जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ हालिया प्रदर्शनों पर सरकार की प्रतिक्रिया से जुड़ा था।

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