बसंकरा निकास द्वार और बेकाबू भीड़ बनी जानलेवा
कोलकाता, 17 अक्टूबर। मां दुर्गा के दर्शन की उमंग, सप्तमी की शाम और बारिश से बचने की कोशिश—इन सबके बीच उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में ऐसा हादसा हुआ कि उत्सव मातम में बदल गया। शनिवार शाम करीब 7:40 बजे निकास द्वार पर मची भगदड़ में 17 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 13 महिलाएं, तीन पुरुष और एक बच्चा शामिल हैं। दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हादसे ने दुर्गा पूजा के दौरान भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चोरबागान का यह पंडाल करीब 91 साल पुराना है और यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
पिछले तीन-चार दिनों से भी यहां भारी भीड़ जुट रही थी। शनिवार शाम बारिश शुरू होते ही बाहर मौजूद लोग भीगने से बचने के लिए पंडाल के भीतर जाने लगे। पहले से मौजूद भीड़ पर दबाव बढ़ा और निकास द्वार पर आवाजाही मुश्किल हो गई। देखते ही देखते लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे और अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस के मुताबिक निकास द्वार पर भगदड़ मच गई थी। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पंडाल का एक हिस्सा ढहने की बात भी कही गई है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने पंडाल में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के इंतजामों पर भी सवाल उठाए हैं। एक चश्मदीद के मुताबिक, प्रवेश और निकास दोनों द्वार संकरे थे तथा इलाके में पर्याप्त रोशनी नहीं थी। उनकी बेटी और पोती भी अस्पताल में भर्ती हैं। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने पत्रकारों को बताया कि कई लोग बेहोश हो गए और कुछ घायलों को मोटरसाइकिलों से अस्पताल ले जाना पड़ा।
चोरबागान घनी आबादी वाला इलाका है, जहां संकरी गलियों के कारण राहत और बचाव कार्य में दिक्कतें आईं।
कोलकाता पुलिस के एक अफसर ने कहा कि पंडाल से अस्पताल तक घायलों को पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण रहा।
मृतकों और घायलों की संख्या पर अलग-अलग दावे
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, हादसे में 25 लोग घायल हुए हैं। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल में करीब 35 घायलों को पहुंचाए जाने और अन्य रिपोर्टों में घायलों की संख्या 40 से 45 तक बताए जाने का दावा किया गया है। कुछ खबरों में मृतकों की संख्या 18 से 20 तक बताई गई है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मृतकों में शहर के बाहर से पूजा देखने आए लोग भी शामिल बताए गए हैं।
हादसे के बाद पुलिस, दमकल, एंबुलेंस और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं। पंडाल को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल अस्पताल पहुंचे। पूजा आयोजकों को पूछताछ के लिए थाने बुलाए जाने की भी खबरें हैं। यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें हिरासत में ले लिया गया है, हालांकि पुलिस।ने इस बात की पुष्टि नहीं की है।
हादसे के बाद चोरबागान पूजा समिति के महासचिव और अन्य पदाधिकारियों के इस्तीफे की भी खबर है।
हादसे के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। पार्टी ने स्थानीय लोगों के हवाले से दावा किया कि घटनास्थल पर पुलिस, सिविक वॉलंटियर्स और एंबुलेंस की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। पार्टी ने मुख्यमंत्री से जिम्मेदारी स्वीकार करने की मांग की।
TMC विधायक कुणाल घोष ने हादसे को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए लोगों से चोरबागान की ओर नहीं जाने की अपील की। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कहा कि इस घटना से वे स्तब्ध हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने पंडाल को मिली अनुमति, अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने पीड़ित परिवारों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग की। हालांकि, सुरक्षा इंतजामों में कथित खामियों को लेकर उठाए गए सवालों का अंतिम जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
प्रधानमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान, शाह के कार्यक्रम रद्द
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और राज्यपाल रवि ने भी हादसे पर शोक जताया।
गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री से फोन पर बात की और रविवार के अपने सभी बंगाल कार्यक्रम स्थगित कर दिए। उनके अस्पताल जाकर घायलों से मिलने की जानकारी दी गई है। राज्य के मंत्री उमेश राय के मुताबिक, मुख्यमंत्री समेत सरकार के अगले दिन के कार्यक्रम भी रद्द कर दिए गए हैं।
सरकार ने हादसे से संबंधित जानकारी के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18003455678 जारी किया है।
सबसे बड़ा सवाल: क्या भीड़ का दबाव टाल सकता था यह हादसा?
करीब नौ दशक से अधिक पुरानी पूजा में हर साल श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती रही है। ऐसे में बारिश के दौरान भीड़ का अचानक बढ़ना, प्रवेश और निकास के रास्तों की क्षमता, आपातकालीन निकासी तथा एंबुलेंस की उपलब्धता जैसे सवाल अहम हो गए हैं।
क्या भीड़ के अनुमान के अनुरूप सुरक्षा इंतजाम किए गए थे? क्या निकास मार्ग पर पर्याप्त जगह और रोशनी थी? क्या आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोई प्रभावी योजना थी? इन सवालों के जवाब जांच से मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल हादसे की सटीक वजह, सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी और मृतकों की अंतिम संख्या को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।










