मुंबई। गुरुवार को शेयर बाजार (Stock Market)में भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 1248 अंक गिरकर 73,581 पर और निफ्टी 384 अंक टूटकर 23,063 पर बंद हुआ। निफ्टी पिछले पांच महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी के 50 में से 48 शेयर लाल निशान में बंद हुए।
क्यों गिरा बाजार?
गिरावट की मुख्य वजहें विदेशी थीं। अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दर (यील्ड) बढ़ने से विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकाल रहे हैं। जब अमेरिकी बॉन्ड पर अच्छा रिटर्न मिलने लगे तो भारत जैसे बाजारों में शेयर रखने का आकर्षण कम हो जाता है।
इसके अलावा कच्चा तेल भी महंगा हुआ। ब्रेंट क्रूड फिर 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत तेल आयात पर निर्भर है, इसलिए महंगे तेल से कंपनियों के खर्च और देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
बीमा कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित
दोपहर में घरेलू खबर ने गिरावट को और तेज कर दिया। बीमा नियामक आईआरडीएआई ने पॉलिसी बेचने के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इससे पॉलिसी बेचने वाली कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका से निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी।
पॉलिसीबाजार की पैरेंट कंपनी पीबी फिनटेक का शेयर करीब 35 प्रतिशत गिर गया। इससे कंपनी की मार्केट वैल्यू में 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आई। इन्फो एज का शेयर भी 6 प्रतिशत से ज्यादा टूटा।
बैंकिंग शेयर भी दबाव में रहे। बैंकएश्योरेंस कारोबार पर असर पड़ने की आशंका से इंडसइंड बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और एक्सिस बैंक समेत कई बैंकों के शेयर गिरे। निफ्टी बैंक इंडेक्स 1110 अंक टूटकर 55,439 पर बंद हुआ।
फाइनेंशियल और इंश्योरेंस शेयरों की कुल मार्केट वैल्यू में करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ और बजाज फिनसर्व जैसे शेयर भी 4 से 6 प्रतिशत तक गिरे।
कुछ शेयरों में चमक भी दिखी
पूरे बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ शेयर चढ़े। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड 5 प्रतिशत ऊपर रहा। एमसीएक्स का शेयर भी करीब 2 प्रतिशत बढ़ा। नए लिस्ट हुए कुछ शेयरों में 20 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली। आने वाले दिनों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल के रुख पर नजर रहेगी।









