निशिकांत ने किया पूर्व वित्त सचिव गर्ग के खिलाफ मानहानि का मुकदमा

नई दिल्ली। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के बीच तगड़ा विवाद छिड़ा है । दुबे ने गर्ग के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया है। यह मामला गर्ग के उस दावे से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दुबे उनके दफ्तर में उनसे मिले थे।गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने गर्ग की आलोचना की और इस बात से इनकार किया कि वे सरकार में गर्ग के कार्यकाल के दौरान उनके ऑफिस गए थे।

दुबे ने एक्स पर लिखा कि पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग की बदतमीजी का जवाब देने का उन्होंने फैसला किया है। उन्होंने उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया है, क्योंकि गर्ग ने अपने ऑफिस में उनके साथ हुई एक मीटिंग का जिक्र किया है। दुबे ने कहा कि वे 2009 में सांसद बने थे और तब से लेकर आज तक भारत सरकार के किसी भी ऑफिस में कभी नहीं गए, क्योंकि प्रोटोकॉल के अनुसार भारत सरकार का सचिव सांसद से नीचे के पद पर होता है।

उन्होंने आगे लिखा कि 2009 से आज तक उन्होंने कभी भी किसी के तबादले या पोस्टिंग के लिए कोई चिट्ठी नहीं लिखी है। अगर गर्ग या उनके किसी दोस्त के पास उनकी किसी चिट्ठी या ऑफिस मीटिंग का सबूत है, तो वे गर्ग को “असली मर्द का बेटा” मानेंगे। दुबे ने यह भी कहा कि सुभाष गर्ग ने देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है और उनके लिए अब जेल ही रास्ता है।

यह नया कानूनी कदम उस सार्वजनिक विवाद का अगला पड़ाव है, जो तब फिर शुरू हुआ जब गर्ग ने सरकार के हालिया जीडीपी ग्रोथ आंकड़ों पर सवाल उठाए। सरकार ने पहली तिमाही की वृद्धि 7.8 प्रतिशत बताई थी। गर्ग का कहना था कि बेसलाइन करंट-प्राइस जीडीपी डेटा में किए गए बदलावों ने असल आर्थिक विस्तार को छिपा दिया है। उनके मुताबिक, अगर पिछले साल के मूल अनुमानों के आधार पर देखा जाए तो नाममात्र जीडीपी ग्रोथ काफी कम निकलती।

गर्ग की इस आलोचना के जवाब में दुबे ने एक पुराना विवाद फिर छेड़ दिया। उन्होंने मार्च 2018 का वह पत्र शेयर किया जो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा था। उस समय गर्ग आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव थे। बाद में मार्च 2019 में वे वित्त सचिव बने।

2018 के पत्र में दुबे ने प्रधानमंत्री से गर्ग के व्यापक आर्थिक ढांचे की समीक्षा करने को कहा था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि राजकोषीय सुदृढ़ीकरण, कड़े राजकोषीय घाटे के लक्ष्य और एफआरबीएम ढांचे का बहुत सख्ती से पालन राष्ट्रीय विकास में बाधा बन रहा है। दुबे का तर्क था कि भारतमाला, सागरमाला, औद्योगिक गलियारे और उड़ान जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए राजकोषीय बचत बढ़ाने के बजाय मजबूत सार्वजनिक वित्तपोषण और लचीलेपन की जरूरत है।

गर्ग ने पॉडकास्ट आदि में यह भी कहा है कि दुबे एक बार उनके ऑफिस आए थे और एलआईसी चेयरमैन के जरिए कोई काम करवाने की बात की थी। दुबे इस दावे को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं और कह रहे हैं कि सबूत पेश किया जाए।

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